
आखिर क्या हुआ ऐसा : नरतप को जिंदा रहने के लिए फरिश्ते का इन्तजार
ओम टेलर. जोधपुर
29 वर्षीय नरपतराम इन दिनों परेशानी के बीच जीवन गुजार रहे है। छोटी सी उम्र में दोनों किडनियां खराब हो चुकी है। डायलिसिस पर जिंदा है। चिकित्सक ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। नरपत की जिदंगी बचाने के लिए उसका भाई किडनी देने को तैयार है लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार किडनी ट्रांसप्लांट का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में नरपत के परिवार को ऐसे फरिश्ते का इन्तजार है जो किडनी ट्रांसप्लांट में उनकी आर्थिक मदद करे या सरकारी स्तर पर सहायता दिलवा कर किडनी ट्रांसप्लांट करवाए। जिससे नरपत ज्यादा समय तक जिंदा रह सके तथा अपने परिवार की देखभाल खुद कर सके।
जोधपुर के निकट रामनगर गांव निवासी नरपतराम (29) पुत्र चुतराराम ने बताया कि उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। घर चलाने के लिए वह किराए की लोर्डिंग टेक्सी चलाता था। लेकिन करीब पांच माह पूर्व सांस की तकलीफ होने पर एम्स में चिकित्सक को दिखाया तो सामने आया कि उनकी दोनों किडनियां खराब है। दो माह तक अस्पताल में भर्ती रहा। उसके बाद चिकित्सक ने सप्ताह में दो बार डायलिसिस करवाने या एक किडनी ट्रांसप्लांट करवाने की सलाह दी। अभी तो डायलिसिस करवाकर जिंदा है।
भाई किडनी देने को तैयार लेकिन ऑपरेशन का खर्चा
सगे भाई की यह स्थिति देख विक्रम जाट उसका जीवन बचाने के लिए खुद की एक किडनी देने को तैयार भी हो गया। लेकिन परिवार के सामने समस्या यह है कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि किडनी ट्रांसप्लांट करवाने का खर्चा वहन कर सके। ऐसे में परिवार को किसी फरिश्ते या स्थानीय प्रशासन से उम्मीद है जो उनका दर्द समझ सके ओर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने में उनकी मदद करे।
घर खर्च चलाने में भी आ रही दिक्कत
नरपतराम के एक वर्ष का बेटा भी है। पिछले पांच माह से वह घर पर है। तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण काम-काज भी नहीं कर पा रहा है। भाईयों की मदद से उनके घर का चूल्हा इन दिनों जल रहा है। लेकिन नरपत को एक ही चिंता सताए जा रही है कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा। आखिर तो उसे अपने घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेनी होगी। यह तभी संभव है जब वह किडनी ट्रांसप्लांट करवाकर स्वस्थ हो सके।
Published on:
27 Jun 2020 07:00 am
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