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जोधपुर जिले में वन्यजीवों की मौत का ग्राफ यूं ही बढ़ता रहा तो बंद हो जाएगी सैन्सस

  पिछले पांच माह में चिंकारे, ब्लेकबक सहित जिले में एक हजार वन्यजीव हुए गंभीर घायल, 700 की हुई मौत

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जोधपुर जिले में वन्यजीवों की मौत का ग्राफ यूं ही बढ़ता रहा तो बंद हो जाएगी सैन्सस

जोधपुर जिले में वन्यजीवों की मौत का ग्राफ यूं ही बढ़ता रहा तो बंद हो जाएगी सैन्सस

जोधपुर. बहुचर्चित फिल्म अभिनेता सलमान खान के काले हरिण व चिंकारों के शिकार मामलों से समूचे विश्व में पर्यावरण प्रेमियों की ओर से हंगामा किया गया लेकिन जोधपुर जिले में पिछले पांच माह के दौरान चिंकारे, ब्लेक बक सहित करीब एक हजार वन्यजीव गंभीर घायल होने और उनमें 700 की मौत पर कोई बोलने वाला तक नहीं है। खुद वनविभाग की ओर से संचालित वन्यजीव चिकित्सालय के आंकड़े दर्शाते है कि माह अप्रेल 2021 से अगस्त 2021 तक कुल 911 से अधिक घायल वन्यजीव लाए गए जिनमें 249 घायल वन्यजीवों को ही बचाया जा सका। यह आंकड़े तो मात्र वनविभाग संचालित वन्यजीव चिकित्सालय के है। इसके अलावा जिले में खेजड़ली, धवा, ओसियां, बिलाड़ा, भोपालगढ़ आदि वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में मृत चिंकारों व ब्लेक बक की संख्या इनमें शामिल नहीं है। जोधपुर जिले में वन्यजीवों की मौत का ग्राफ यूं ही बढ़ता रहा तो आगामी वर्षों में हर साल होने वाली ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन वन्यजीव गणना को बंद करना पड़ सकता है।

घायल होने का प्रमुख कारण
गर्मी में तालाबों व खेळियों के आस पास टोह में बैठे रहने वाले हिंसक श्वानों के हमलों और बारिश के मौसम में नमभूमि पर दौडऩे में असमर्थ चिंकारे सर्वाधिक घायल होते है। राज्य पशु चिंकारे को प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह हानि पहुंचाने अथवा शिकार करने पर तीन से सात साल तक सजा का प्रावधान है।

जोधपुर रेस्क्यू सेंटर में लाए घायलों का आंकड़ा

माह-------------संख्या ------ मौत
अप्रैल------------135 ------104

मई---------------255 ------180
जून--------------195 ------125

जुलाई------------178 ------132
अगस्त-------------148------ 121

कुल---------------911 ------662

इस साल कम घायल हुए
पिछले साल की तुलना में इस बार बारिश के मौसम में कम वन्यजीव घायल हुए है। पिछले साल कुल 1614 वन्यजीव घायल हुए थे। इससे पहले वर्ष 2018-19 में 2040 और 2019-20 में 1867 गंभीर घायल हुए थे। संसाधनों की कमी के बावजूद जोधपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से घायल वन्यजीवों को बचाने रेस्क्यू टीम 24 घंटे प्रयासरत है।

विजय बोराणा, उप वन संरक्षक वन्यजीव , जोधुपर