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नगर निगम की भवन निर्माण कमेटी की बैठक करीब तीन माह बाद शुक्रवार को होनी है, लेकिन हैरत की बात यह है कि बैठक में रखी जाने वाली पत्रावलियों में से कई एेसी पत्रवालियां सामने आई हैं, जिनमें बिना डीम्ड परमिशन के निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो गया है, जबकि इन भूखंड मालिकों ने अब निगम में भवन निर्माण की परमिशन के लिए आवेदन दिए हैं।
करीब तीन माह बाद होने वाली भवन निर्माण कमेटी अभी से ही विवादों में आने लगी है। बैठक में रखे जाने वाले प्रकरणों को लेकर निगम अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। भवन निर्माण कमेटी की बैठक में इस बार करीब 46 प्रकरण रखे जाएंगे। इन प्रकरणों में कुछ प्रकरण एेसे सामने आए हैं, जिसमें मौके पर निर्माण पहले ही हो गए हैं और अब उन्होंने भवन निर्माण कमेटी की बैठक में भवन बनाने की इजाजत मांगी है। साथ ही इन 46 प्रकरणों में एक प्रकरण एेसा भी है जिसके भूखंड मालिक ने पिछले लंबे समय से सड़क सीमा पर बनी हुई दुकानों को हटाने के लिए शपथ पत्र दिया, लेकिन अभी तक दुकानों को हटाया नहीं गया है।
मौका रिपोर्ट में भूखंड खाली
बैठक में रखी जाने वाली इन तमाम पत्रावलियों की मौका रिपोर्ट निगम के जोन जेईएन की है। जेईएन ने तो रिपोर्ट में बाकायदा कई प्लॉट पर खाली भूखंड होना बताया हैं, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य चालू है, तो कहीं पर पहले से ही निर्माण हो रखा है। उसे खाली प्लॉट दर्शाया गया है। इसके अलावा मास्टर प्लान में प्रस्तावित रोड सीमा पर बनी दुकानों को हटाने के लिए भी निगम की आेर से बार-बार कहने पर भी शपथ पत्र की आड़ में दुकानें चलाने वाले भूखंड मालिक के पक्ष में भी जोन जेईएन ने रिपोर्ट दी है।
देर शाम तक उपमहापौर के पास नहीं पहुंची पत्रावलियां
उपमहापौर के लगातार पत्रावलियां मांगने के बाद भी बैठक से एक दिन पहले तक उनके पास कोई पत्रावली नहीं पहुंची। पत्रावलियां देर शाम तक निगम आयुक्त के पास ही चर्चा के लिए पड़ी रही। देर शाम सात बजे तक निगम आयुक्त उपायुक्तों और एसटीपी के साथ पत्रावलियों पर चर्चा करते रहे। उधर, उपमहापौर देवेंद्र सालेचा से बात करने पर उन्होंने बताया कि पत्रावलियों पर लीगल टिप्पणियां नहीं हुई, इसलिए उनके पास पत्रावलियां नहीं पहुंची। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह सभी पत्रावलियों को पढ़कर उन पर निर्णय किया जाएगा।
ये उठ रहे सवाल
- निर्माण पहले शुरू हुआ तो वार्ड प्रभारी ने क्यों नहीं दिया ध्यान
- मौका रिपोर्ट में जेईएन ने कैसे बताया खाली भूखंड
- निगम अधिकारियों को क्यों नहीं लगी भनक
- बैठक पहले से तय थी तो समय पर पत्रावलियों पर काम करके क्यों नहीं भेजी गई उपमहापौर के पास- मौका रिपोर्ट के आधार पर स्वीकृति मिलती तो अवैध निर्माण को मिलता बढ़ावा
Published on:
21 Apr 2017 08:03 pm
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