30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पहले बेखौफ होकर जोधपुर के पहाड़ों पर बनाए आशियाने, अब खौफ के साये में पल रही सैंकड़ों जिंदगियां

शहर में कई क्षेत्र ऐसे जहां पहाड़ों पर बस गए लोग, कईयों के कब्जे वैध हो गए तो कई बस्तियां आज तक हैं अवैध, वोट बैंक खिसकने के डर से सरकारें नहीं उठाती सख्त कदम

3 min read
Google source verification
illegal construction nearby hills of jodhpur are becoming dangerous

पहले बेखौफ होकर जोधपुर के पहाड़ों पर बनाए आशियाने, अब खौफ के साये में पल रही सैंकड़ों जिंदगियां

अविनाश केवलिया/जोधपुर. शहर में पिछले कुछ समय से पहाड़ ही नुकसान देने लगे हैं। पिछले कुछ दशकों में हमारे शहर की जनता जमीन को छोड़ पहाड़ों पर रहने लगी है। कई जगह तो पहाड़ नजर भी नहीं आते। इसी का खामियाजा अब लैंड स्लेडिंग (पत्थर खिसकना) के रूप मेें हमें देखने को मिल रहा है। मसूरिया क्षेत्र में हुई इस घटना ने हमारे सामने कई सवाल खड़े किए हैं। साथ ही एक चेतावनी भी दी है कि यदि पहाड़ों के साथ खिलवाड़ जारी रहा तो भविष्य में बड़े हादसे भी हो सकते हैं।

IMAGE CREDIT: manoj sain

शहर में बरसों से पहाड़ों के बीच कब्जा कर बसे लोग धीरे-धीरे अपनी सहूलियत के लिहाज से पहाड़ों पर मकान बनाने लगे। नगर निगम के रिकॉर्ड की बात करें तो शहर में 300 से ज्यादा कच्ची बस्तियां चिह्नित हैं। इनमें करीब 1 लाख से अधिक मकान हैं। मतलब इनके पास किसी प्रकार का पट्टा नहीं है। ये हालात कई सालों से हैं। लेकिन इनको रोकने या कार्रवाई नहीं करने के पीछे राजनीतिक लाभ भी छुपा है। राजनेताओं की शह पर ही इस प्रकार के कब्जे होते हैं।

IMAGE CREDIT: manoj sain

पहाड़ों को खोद कर पत्थरों को खोखला कर रहे
पहाड़ों के समीप रहने वाले कई लोग अपने मकान वैध होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन वह धीरे-धीरे पहाड़ों के निचले हिस्से को खोद कर अपने मकान का हिस्सा पीछे की ओर बढ़ा रहे हैं। इससे पहाड़ नीचे खोखला हो रहा है और पत्थरों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। मसूरिया व शहरी क्षेत्र पचेटिया हिल के समीप बने मकानों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं।

IMAGE CREDIT: manoj sain

पहाड़ों तक बना दिए आशियाने
- पहाडग़ंज प्रथम और द्वितीय
- पन्नालाल गोशाला के समीप
- संतोषी माता मार्ग पर
- मगराजजी का टांका
- मसूरिया पहाड़ी के आस-पास का क्षेत्र
- सूथला की पहाड़ी के समीप
- सूरसागर का कुछ हिस्सा
- बापू कॉलोनी मसूरिया पहाड़ी
- शिप हाउस के समीप
- किला घाटी
- चांदणा भाकर
- गुलजारपुरा
- भील बस्ती किला रोड
- सिटी पुलिस क्षेत्र
- बलदेव नगर
- लायकान मोहल्ला का कुछ क्षेत्र
- गिड़ा वास

IMAGE CREDIT: manoj sain

निगम-जेडीए करें पहल
पहाड़ों पर मकान बनाना एक तरह का कब्जा है। जो खतरे पर है उनकी सुरक्षा बहाल करनी चाहिए। उनको किसी अन्य स्थल पर शिफ्ट करना चाहिए। निगम-जेडीए यह काम कर सकते हैं। साथ ही सरकार व निकायों को चाहिए कि अब आगे इस प्रकार पहाड़ों पर कब्जे न हो। इन कब्जों को रोकना ही एकमात्र उपाय है। अगस्त 2009 के पहले जो लोग ऐसे क्षेत्रों में परिवार सहित बसे हैं और जिनके पास रहने को कोई दूसरा स्थान नहीं है उसके लिए पुनर्वास का नियम है। सरकार उनको किसी सुरक्षित स्थान पर बसा सकती है।
- हरिसिंह राठौड़, सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी (नगर निगम के सीईओ व आयुक्त रह चुके हैं)

Story Loader