
जोधपुर। पचास डिग्री के तापमान पर तपते रेत के धोरे हों या फिर माइनस जीरो डिग्री की हाड़कंपाती सर्दी। पड़ोसी मुल्क से उठने वाली काली पीली आंधी हो या महज दस फीट के बाद देखना मुश्किल कर देने वाला कोहरा।
सीमा सुरक्षा बल के जवानों के हौसले के आगे यह सब यहीं नहीं टिकता। सीमा पार से होने वाली किसी भी नापाक हरकत को रोकने के लिए जवानों के जज्बे के आगे विषम मौसम भी एक तरह से हार जाता है।
पड़ोसी मुल्क पाक से लगती राज्य के चार जिलों की सीमा पर भले ही बर्फबारी नहीं होती लेकिन यहां हर मौसम किसी चुनौती से कम नहीं होता। सर्दी के साथ ही जवानों ने फिट रखने के लिए मौसम के हिसाब से ढालना शुरु कर दिया जाता है।
मौसम को मात देने के लिए वैसे तो आधुनिक हथियार एवं संसाधन भी होते हैं लेकिन खानपान एवं पहनावे का बदलाव भी मौसम के हिसाब से जरूरी है।
ये तरीके भी कारगर
तारबंदी पर दो—दो खाली बोतलें सटाकर बांधी जाती हैं ताकि कोई नापाक हरकत होने पर बोतल बजने की आवाज से चौकन्ना हो जाएं। अलार्म आदि की व्यवस्था भी है। विशेष दूरबीन भी मदद करती है।
किस मौसम में कैसा बदलाव
गर्मी—जवान सूती कपड़े पहनते हैं। नींबू पानी की बोतल, ग्लूकोज दही का उपयोग।
सर्दी— गर्म इनर, गर्म कपड़े, टोपी पहनते हैं। चाय का सहारा लेते है।
कोहरा— ओस से बचने के लिए रेन कोट भी पहना जाता है।
Updated on:
06 Nov 2020 06:04 pm
Published on:
06 Nov 2020 06:04 pm
