
देश में पहली बार मकान बनाने को लेकर गाइड बुक लॉन्च करेगी केंद्र सरकार, आइआइटी जोधपुर का यूं है योगदान
गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. देश के प्रत्येक परिवार के पास 2022 तक अपना घर बनाने की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के बाद अब सरकार आम आदमी को अपना मकान स्वयं की देखरेख में बनाने का तरीका व इंजीनियरिंग भी बताने जा रही है। इसके लिए शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से ‘होम ऑनर्स गाइड फॉर अर्थक्वेक एण्ड साइक्लोन’ पुस्तक का अनावरण किया जाएगा।
यह पुस्तक आइआइटी जोधपुर के पूर्व निदेशक व वर्तमान में आइआइटी मद्रास के सिविल विभाग के प्रो. सीवीआर मूर्ति ने लिखी है। नेपाल में अप्रेल 2015 में आए भूकम्प और भारत में हर साल आ रहे उष्णचक्रवाती तूफानों व बाढ़ के कारण मोदी सरकार ने यह जिम्मेदारी प्रो. मूर्ति को दी थी। प्रो. मूर्ति के साथ आइआइटी मद्रास के प्रो. रुपेन गोस्वामी ने भी सहयोग किया।
राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज अलवर के राजकुमार पटेल ने 112 पन्नों की इस किताब में कैरिकेचर के माध्यम से घर बनाने की तकनीक बताई है, जिसे आम आदमी भी चित्र देखकर समझ सकता है। इस किताब में बताया गया है कि भूकम्प, बाढ़, चक्रवात और चट्टानों के खिसकने का क्षेत्र होने पर मकान कैसा बनाया जाना चाहिए।
ये 5 पहलू ध्यान रखने पर बनेगा मजबूत घर
1. स्थान : मकान बनाने के लिए जिस जगह का चुनाव किया है, उसका बेहद महत्व है।
2. मकान की संरचना : वर्तमान में लोग टी, एल और सी आकार में मकान बना रहे हैं जो गलत है। लोगों को आयातकार मकान बनाने चाहिए। मकान की मजबूती दीवारों पर निर्भर है इसलिए बड़े दरवाजें और खिड़कियां लगाने से बचना चाहिए। दरवाजा उतना ही जितना व्यक्ति आ-जा सके। खिडक़ी जरूरत के अनुसार ही हो।
3. सामग्री : तीन महीने से पुरानी सीमेंट काम में नहीं लें। सीमेंट को नमी से बचाने के लिए ढककर रखें। गोलाकार पत्थर उपयोग में नहीं लेने चाहिए। भूकम्प के समय मकान की दीवारें फिसलकर गिर जाएंगी। आरसीसी में काम आने वाले स्टील के सरियों को लम्बा करने पर उनकी चौड़ाई 10.25 से 25 प्रतिशत के मध्य होनी चाहिए अन्यथा वे बीच में से टूट जाएंगे। जहां भू-जल स्तर अधिक है वहां मुलायम मिट्टी उपयोग में नहीं लेनी चाहिए।
4. तकनीक : दीवार के किनारों पर खिड़कियां नहीं रखें। मकान की लम्बाई, चौड़ाई की 3 गुणा से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर भू-तल खाली है तो चारों तरफ खाली जगह नहीं रखें। एक तरफ मजबूत दीवार रखें। दीवारों को हमेशा किनारे से उठाना चाहिए। आरसीसी के बीम व कॉलम को आपस में 135 डिग्री के कोण पर बंद आकार में जोडऩा चाहिए। छत पर पानी की टंकी आरसीसी से जुड़ी होनी चाहिए।
5. प्रोफेशनल्स व आर्टिजन : इनका सही चुनाव करने पर मजबूत मकान बनाया जा सकता है।
कई तरह की आपदाएं आती हैं, मकान का बचाव जरूरी
- भारत में 95 फीसदी लोग स्वयं की देखरेख में मकान बनाने हैं। केवल 5 प्रतिशत ही ठेकेदार से बनाते हैं।
- देश की 57 प्रतिशत भूमि भूकम्प के लिहाज से तीसरे, चौथे व पांचवें जोन में आती है, जिसमें 79 प्रतिशत जनता रहती है।
- 7516 किलोमीटर फैली तटीय रेखा के सहारे बंगाली की खाड़ी व अरब सागर से हर साल चक्रवाती तूफान आते हैं जिससे 13 राज्यों के 84 जिले प्रभावित होते हैं।
- देश की 12 प्रतिशत भूमि बाढ़ प्रभावित है। हर साल 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ आती है।
सुरक्षा सबसे बड़ी बात
किताब के विमोचन से पहले बोलना ठीक नहीं है। मैं इतना ही कहूंगा कि देश में मकान की सुरक्षा बड़ी चीज है। मकान कहां पर किस सामग्री, किस इंजीनियरिंग व किसके द्वारा निर्मित किया जा रहा है, बहुत महत्व रखता है।
प्रो. सीवीआर मूर्ति, पूर्व निदेशक आइआइटी जोधपुर (वर्तमान में आइआइटी मद्रास के सिविल विभाग में कार्यरत हैं।)
Published on:
27 Sept 2019 11:30 am
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