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अग्निकांड के बाद भी जोधपुर के भीतरी बाजार में नियम ताक पर, आंखें मूंद कर बैठा नगर निगम

राजस्थान पत्रिका ने सोमवार को हाथीराम का ओडा स्थित एक प्लास्टिक गोदाम में भीषण आग लगने के बाद परकोटे के हालात जाने।

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अभिषेक बिस्सा/जोधपुर.सालों पुराना जोधपुर का भीतरी शहर। 50-50 साल पुराने प्रतिष्ठान। ताज्जुब कीजिए की कई गलियां तो ऐसी हैं कि आग लग जाए तो आसपास की दुकानों से सटे सारे इलाके पल भर में स्वाह हो जाएंगे। इन दुकानों पर कभी नगर निगम ने आग सुरक्षा के इंतजाम तक आकर नहीं देखे। नगर निगम इन दुकानों को नियम विपरीत संचालन के दौरान सीज करने के लिए शिकायत का इंतजार करता है। कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई तक नहीं होती। राजस्थान पत्रिका ने सोमवार को हाथीराम का ओडा स्थित एक प्लास्टिक गोदाम में भीषण आग लगने के बाद परकोटे के हालात जाने। यहां पग-पग पर अवैध प्रतिष्ठान व अतिक्रमण नजर आए।

भीतरी शहर के मेहता मार्केट, त्रिपोलिया बाजार व पान गली व आसपास छोटी-बड़ी गलियों में सैकड़ों की तादात में नियमों के विपरीत प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। सभी पूरी तरह से रहवासीय इलाकों में कॉमर्शियल गतिविधियों की श्रेणी में आते हैं। यहां ज्यादात्तर प्रतिष्ठान एक ही स्थान पर दुकान व गोदाम का संचालन कर रहे हैं। ऊपर गोदाम व नीचे दुकानें चल रही हैं, वे भी अवैध। बरसों पुराने प्रतिष्ठानों के पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है।

सीसीटीवी कैमरे पर फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं

भीतरी शहर में कई दुकानदारों ने चोरी के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए लेकिन एक भी प्रतिष्ठान में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है। ऐसे में साफ है कि व्यापारियों को जिंदगी से ज्यादा माल की फिक्र है। जबकि त्रिपोलिया व मेहता मार्केट जैसे स्थानों पर बड़े-बड़े कपड़े के प्रतिष्ठान एवं गोदाम हैं। यहां शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग में करोड़ों रुपए के माल स्वाह होने की घटना हो सकती हैं। कइयों की जान तक जा सकती है। इन स्थानों पर दमकल की गाडिय़ां पहुंचाने में पसीने छूट जाते हैं।

अतिक्रमण ऐसा, बाइक लेकर नहीं निकल सकते

जालोरी गेट के अंदर जौहरी बाजार, खांडा फलसा, कुम्हारिया कुआं, आड़ा बाजार, मिर्ची बाजार, कटला बाजार व त्रिपोलिया बाजार सहित कई दुकानदारों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखे हैं। ऐसे में यहां आए दिन सवारी ऑटो व दुपहिया वाहन भी आसानी से नहीं निकल पाते। इन अतिक्रमणों के खिलाफ नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं करता। इसके अलावा लोडिंग टैक्सियां भी मनमर्जी से आ-जा रही हैं।

यहां लगने होते हैं फायर सेफ्टी सिस्टम

शहर में दो मंजिला से ऊपर बिल्डिंग, होटल, दुकान व गोदाम में नियमानुसार फायर सेफ्टी सिस्टम होना चाहिए। इसके लिए अग्निशमन विभाग अनुमति निरीक्षण पश्चात जारी करता है। लेकिन परकोटे में कॉमर्शियल एक्टिविटी की अनुमति नहीं है, इस कारण यहां व्यापारी भी फायर सेफ्टी की अनुमति लेने की मांग नहीं करते। परंपरागत दुकानों पर नेताओं की शह के चलते निगम अधिकारी भी यहां कार्रवाई करने से कतराते हैं।

कागजों में फायर माउंटेन वाहन

नगर निगम के तत्त्कालीन बोर्ड के समय भीतरी शहर के लिए साल 2009-10 में फायर माउंटेन वाहन के क्रय करने की घोषणा हुई थी। जो शहर की छोटी-छोटी गलियों के लिए आना था। ताकि घटना के दौरान दमकल समय पर पहुंच आग पर नियंत्रण पा सके। ये वाहन आजतक नहीं आया। वर्तमान में कुल 19 गाडिय़ां हैं। जिनमें 3 बड़ी, शेष मध्यम वाहन हैं। दमकल वाहनों में पानी भरने के लिए फायर स्टेशन पर ट्यूबवेल व हाईडेन्ट पॉइंट भी नाकाफी है। जबकि ये पॉइंट गुलाबसागर, फतहसागर व तख्तसागर जैसे स्थानों पर बनाए जा सकते हैं। क्योंकि यहां पांच-सात फीट पर ही पानी है। इसके अलावा वाहन नहीं घुसने वाले शहर के तंग इलाकों में भी हाइडेन्ट पॉइंट बनाए जा सकते हैं।