
ऋण माफी योजना में घपले की ऑडिट पंद्रह दिन में पूरी करने के निर्देश
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने किसानों के नाम से फर्जी ऋण उठाकर माफी योजना का लाभ लेने के घपले को लेकर सहकारिता विभाग के संयुक्त मुख्य लेखा परीक्षक से विवादित ऋणों से संबंधित खातों की ऑडिट पंद्रह दिन में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। ऑडिट रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव तथा न्यायाधीश मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ में याचिकाकर्ता सिमरथाराम की ओर से अधिवक्ता निखिल डूंगावत तथा भंवरलाल की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने पैरवी करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के हित में राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना 2019 लागू की थी। याची सहित कई किसानों की जानकारी में आया कि उनके नाम से ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ऋण उठा लिए हैं और ऋण माफी योजना में उनके नाम का ऋण माफ हो गया है, जबकि याचिकाकर्ताओं ने कोई ऋण नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने इन अनियमितता की शिकायतें की, लेकिन शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में जांच प्रतिवेदन में यह माना गया कि फर्जी तरीके से ऋण उठाए गए थे और उन्हें माफ किया गया। कुछ लोगों को दोषी पाया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, जालोर शाखा सायला की जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि 7 करोड़ के फर्जी ऋण वितरण हुए हैं। याचिकाओं में यह याचना की गई थी कि राज्य सरकार फर्जी खातों से रकम उठाने और उन्हें पुन: सरकारी खातों मेेें मय ब्याज जमा करवाने जैसे घपले को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाए। कोर्ट ने पूर्व में सहकारिता विभाग के संयुक्त मुख्य लेखा परीक्षक से विवादित ऋणों से संबंधित खातों की ऑडिट तीन महीने में पूरी करने के आदेश दिए थे। सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील बेनीवाल ने ऑडिट पूरी करने के लिए पंद्रह दिन की मोहलत मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
Published on:
12 Apr 2022 06:58 pm
