
अंतरराष्ट्रीय परीक्षा जीमैट बनी मजाक
जोधपुर. केंद्र सरकार की एसएससी, राज्य सरकार की आरपीएससी की परीक्षाओं में ही गड़बडि़यां होती आई हैं। इस फेहरिस्त में अंतरराष्ट्रीय परीक्षा जीमैट (जनरल मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट) का नाम भी जुड़ गया है। विश्व के 114 देशों के मैनेजमेंट पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आयोजित जीमैट में बैठने के लिए जोधपुर के एक छात्र को पिछले एक महीने से टरकाया जा रहा है। छात्र ने दो हजार डॉलर का हर्जाना मांगा, तब जाकर जीमैट काउंसिल की नींद खुली है।
यह है मामला
जोधपुर के क्षितिज भार्गव ने १८ हजार रुपए फीस भरकर जीमैट के लिए आवेदन किया। उसने १६ मई परीक्षा तिथि मांगी। काउंसिल ने उसे जयपुर परीक्षा केंद्र दिया। क्षितिज १६ मई को परीक्षा केंद्र पर पहुंचा तो वहां न पासपोर्ट स्कैन के लिए सुचारू मशीन थी और न ही इंटरनेट सहित कम्प्यूटर। परीक्षा केंद्र संचालक ने क्षितिज को किसी और दिन परीक्षा देने के लिए आने का कहा। क्षितिज ने इसकी शिकायत ई-मेल से जीमैट काउंसिल से की। काउंसिल ने गलती मानकर क्षितिज को केस नम्बर जारी किया और दो-तीन दिन में परीक्षा करवाने की बात कही। बीस दिन से यही सिलसिला चल रहा है। क्षितिज ने अब दो हजार डॉलर हर्जाने की मांग की है।
5 साल तक मान्य है स्कोर कार्ड
जीमैट का स्कोर कार्ड पांच साल तक मान्य रहता है। परीक्षा ८०० अंकों की होती है। कम्प्यूटर बेस्ड परीक्षा में ७०० से अधिक अंक लाने वाले को एमबीए के लिए अच्छे कॉलेज मिल जाते हैं।
मेरे कई परीक्षाएं छूट गई
जीमैट काउंसिल की वजह से टॉफेल सहित कई परीक्षाओं में मैं समय पर नहीं बैठ पाऊंगा। मुझे लगता था कि भारत में ही परीक्षाओं में गड़बड़ी होती आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परीक्षा में भी एेसा होगा, सोचा नहीं था।
क्षितिज भार्गव, छात्र
एक सप्ताह में परीक्षा करवा देंगे
हम एक सप्ताह में छात्र की परीक्षा करवा देंगे। आप छात्र को हमसे सम्पर्क करने के लिए कहें। जरूरत हुई तो हर्जाना भी दे देंगे।
रोनाल्डो, एडवाइजर, जीमैट इंडिया, गुडग़ांव
Published on:
06 Jun 2018 09:14 pm
