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Jodhpur Curfew Flashback- 32 साल पहले 27 दिन कर्फ्यू का दंश झेल चुका जोधपुर

Jodhpur Curfew Flashback- बंटवारे के वक्त दंगों में भी नहीं आई थी ऐसी नौबत

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 Jodhpur Curfew Flashback- 32 साल पहले 27 दिन कर्फ्यू का दंश झेल चुका जोधपुर

Jodhpur Curfew Flashback- 32 साल पहले 27 दिन कर्फ्यू का दंश झेल चुका जोधपुर

Jodhpur Curfew Flashback- सुरेश व्यास/जोधपुर. अपणायत के लिए दुनियाभर में मशहूर जोधपुर में आजादी के बाद बंटवारे के वक्त भी कोई दंगा नहीं हुआ और 1990 तक तो यहां के लोगों ने केवल कर्फ्यू नाम ही सुना था। वहीं जोधपुर पिछले दो दिनों से मामूली बात पर तनाव के बाद हिंसक घटनाओं और कर्फ्यू के कारण एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन रहा है। पिछले दो दिन से लगभग पूरा परकोटा शहर और इससे सटे इलाकों समेत दस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू है। घरों में कैद लोगों को भी अचम्भा हो रहा है कि आखिर गंगा-जमुनी संस्कृति वाले इस शहर को सियासत की नजर कैसे लग गई। लोग 32 साल पहले यानी 1990 में लगातार 27 दिन तक चले कर्फ्यू को याद करके आज भी सहम जाते हैं। भारत-पाक बंटवारे के वक्त देशभर में फैली नफरत की आग में हजारों लोगों की जिंदगियां चली गई, उस वक्त भी जोधपुर में दंगा नहीं हुआ।

जब पहली बार लगी सौहार्द को नजर
मगर, अपणायत के शहर जोधपुर की शोहरत को पहला दाग 1990 में लगा। भाजपा नेता की रामरथ यात्रा को बिहार में रोके जाने के विरोध में आहूत राजस्थान बंद के दौरान अन्य शहरों के साथ यहां भी पथराव व आगजनी की हिंसक वारदातें हुई। हालात बिगड़े तो 24 अक्टूबर को जोधपुर में भी पहली बार कर्फ्यू लागू किया गया। हालात काबू करने सेना को बुलाना पड़ा। पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। हिंसा की वारदातों में करीब 20 लोगों की जान गई थी और करीब एक सौ से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। कर्फ्यू लगातार 27 दिन तक यानी 19 नवम्बर 1990 तक चला।

कर्फ्यू देखने निकल गए
इससे पहले कर्फ्यू का नाम यहां के लोगों ने खबरों में पढ़ा-सुना ही था। कर्फ्यू होता क्या है, यह देखने के लिए लोग उसी तरह बाहर निकल आए, जैसे दिवाली पर रोशनी देखने निकलते हैं। कई लोगों को पुलिस व सेना की सख्ती झेलनी पड़ी। पूछने पर मासूमियत के साथ ऐसे लोग जवाब भी दे देते थे कि कफ्र्यू देखने जा रहे हैं, लेकिन कई लोग डंडा प्रसादी के साथ चेतावनी सुनकर लौटे तो कर्फ्यू खत्म होने तक बाहर नहीं निकल पाए।

पहले कुछ घंटे छूट, फिर रात्रि कर्फ्यू
लोगों को यहां दूध-सब्जी संग्रहण की आदत नहीं थी। अचानक कर्फ्यू लगा तो दिक्कत हो गई। पहली बार जब कर्फ्यू में कुछ घंटों की छूट मिली तो लोग बाजारों में उमड़ पड़े। छूट अवधि खत्म होने से एक घंटे पहले ही पुलिस की गाडिय़ां निर्धारित समय से पहले घरों में घुस जाने की मुनादी शुरू कर देती। कई दिन तक यह सिलसिला चला। बाद में दिन का कर्फ्यू हटा और 19 नवम्बर 1990 तक रात्रिकालीन कर्फ्यू चलता रहा।