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संकरी राह में अटक गया विकास

- जेडीए की धीमी रफ्तार से रूक गया बाइपास और अन्य कॉलोनियों का विकास- अब बाइपास को चौड़ा करने की कार्रवाई अधरझूल में अटकने से फिर टूटी उम्मीदें

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Jodhpur : Development Stuck in the narrow path

बासनी (जोधपुर). जयपुर-जैसलमेर बाइपास को 200 फुट चौड़ा करने की कवायद के चलते जेडीए प्रशासन ने सरकारी व निजी संस्थाओं के भवनों पर लाल चौकड़ी तो लगा दी लेकिन इस बाइपास पर पग पग मौत मंडरा रही है। जिस पर प्रशासन का आज दिन तक ध्यान नहीं गया। पिछले कई सालों से यहां सैकड़ों लोगों की जानें गई, अब प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के डंडे से जागा है। शुरूआत भी ऐसी हुई कि बाइपास को चौड़ा करने की कार्रवाई रोड किनारे सरकारी भवनों की दीवारों को अतिक्रमण मानते हुए हटाने को लेकर अधरझूल में अटक गई है। प्रशासन का यही रवैया रहा तो इस बाइपास और उसके पास कॉलोनियों के विकास की गति और धीमे हो जाएगी।

इस बाइपास को बने हुए कई साल हो गए। सड़क की चौड़ाई आदि को लेकर इसमें कई खामिया छोड़ दी। सांगरिया बाइपास चौराहे पर बने ब्रिज की कम चौड़ाई के कारण भारी वाहन आमने सामने टकराते टकराते बचते हुए निकलते हैं। इस बाइपास से निकलने वाले दुपहिया वाहन चालक तो अपनी जान जोखिम में डालकर ही निकलते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की आदेशों की पालना में जेडीए इस बाइपास के आसपास 75-75 फुट के दायरे में आने वाले निर्माण को अतिक्रमण मानते हुए नोटिस दे रहा है। जबकि डीपीएस सर्किल से लेकर शताब्दी सर्किल तक रोड के किनारे सैकड़ों भारी वाहन इस बाइपास को संकरा कर रहे हैं जिससे आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं। यहां सांगरिया बाइपास चौराहे पर लंबे समय से लोग ट्रैफिक सिग्नल लगाने की मांग कर रहे हैं लेकिन यातायात पुलिस का एक सिपाही भी यहां दिखाई नहीं देता है। जिस तत्परता से जेडीए ने मकान मालिकों और सरकारी कार्यालय पर लाल चौकड़ी लगायी और नोटिस दिए, उस तर्ज पर यहां रूके हुए काम भी शुरू हों तो स्थानीय बाशिंदों को काफी राहत मिलेगी लेकिन इसके उलट जेडीए ने नोटिस देकर मकान मालिकों को दुविधा में डाल दिया है।

17 साल पहले हुए फैसले पर अब खुली नींद

यूडीएच प्रमुख शासन सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय भू परिर्वतन समिति की बैठक में 16 नवंबर 2000 में कुड़ी आवासीय योजना से निकल रहे बाइपास की चौड़ाई 200 फुट रखने और 75-75 फुट हरित पट्टी रखने का निर्णय हुआ था। उसके 17 साल बाद अब जेडीए ने उच्च न्यायालय की याचिका संख्या 1554 वर्ष 2004 गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान राज्य के निर्णय की अनुपालना में यहां सक्रियता दिखाई है। अब इसरो, कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड एक्सईएन ऑफिस, कुड़ी भगतासनी पुलिस थाने की दीवार को अतिक्रमण मानते हुए लाल क्रॉस लगा दिए हैं। इसके अलावा कई मकान मालिकों को भी हरित पट्टी में दायरे में मानते हुए अतिक्रमण के नोटिस थमाए हैं। इसमें जेडीए ने मकान मालिकों से मकान से जुड़े हुए दस्तावेज मांगे हैं।

मकान बने, सरकारी कार्यालय खुले, सड़क होती रही बदहाल

राजस्थान आवासन मंडल की ओर से इस बाइपास पर वर्ष 2012-13 में इसरो को जमीन आवंटित की। उसके बाद इसरो ने यहां अपना भवन बनाकर लगभग तैयार कर दिया है। जहां काजरी से इसरो का रीजनरल रिमोट सेंसिंग सेंटर शिफ्ट किया जाएगा। इस भवन की नींव रखने के लिए वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री खुद शिलान्यास करने आई। उसके बाद भवन बनकर तैयार हो गया। वहीं इसी बाइपास पर कुड़ी भगतासनी थाना इस साल ही नए भवन में शिफ्ट हुआ है। हाउसिंग बोर्ड का एक्सईएन ऑफिस भी इसी रोड पर है। इसी बाइपास पर डीपीएस स्कूल है। जहां हजारों बच्चे रोजाना आते जाते हैं। इतना सबकु छ होते हुए भी बाइपास पर दोनो व्यस्ततम चौराहे डीपीएस सर्किल और सांगरिया बाइपास चौराहा दोनों अव्यवस्थित है। सड़क भी कई जगह संकरी और टूटी हुई है। बाइपास के किनारे कचरे के ढेर इस तरह लगे हुए हैं मानो यहां निगम का डंपिंग यार्ड हो।

विवेक विहार के लिए नहीं जागा स्व विवेक

3 हजार से ज्यादा भूखंडों वाली जेडीए की पहली आवासीय योजना आवंटन के बाद ठप पड़ी है। यहां इक्के दुक्के मकान बने हैं। यहां जेडीए ने कई सब्जबाग दिखाकर हजारों भूखंडों का आवंटन तो कर दिया लेकिन सड़क, बिजली सहित अन्य जन सुविधाओं का विकास नहीं किया। यहां एज्युकेशनल सेंटर, सरकारी बैंक सहित अन्य सार्वजनिक सुविधाओं वाले संस्थानों के लिए जमीन छोड़ दी। इस कॉलोनी में कुछेक मुख्य सड़कें बना दी लेकिन इंटरनल सड़कों का विकास नहीं किया। इस कॉलोनी के विकास से जेडीए ने एक तरह से हाथ खड़े कर दिए हैं। इस कॉलोनी के लिए जमीन देने वाले कई काश्तकारों को अभी तक सरकार ने पूरा मुआवजा नहीं दिया है। वे जेडीए के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।

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