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जोधपुर: आओ जानें अपने विभाग- मरु प्रादेशिक केन्द्र, भारतीय प्राणि सर्वेक्षण

- मरु क्षेत्र में प्राणि जगत के अनुसंधान में कर रहा है काम

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Jodhpur: Know our department- Desert Regional Centre of ZSI

भारतीय प्राणि सर्वेक्षण का जोधपुर स्थित मरु प्रादेशिक केन्द्र

बासनी (जोधपुर).

भारतीय प्राणि सर्वेक्षण भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन काम कर रहा है। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में 1916 में इम्पीरियल सर्वे ऑफ इंडिया के नाम से हुई थी। देश की आजादी के बाद इसका नाम भारतीय प्राणि सर्वेक्षण(जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) हो गया। इसका मुख्यालय कोलकाता में है। जेडएसआई के अधीन 16 क्षेत्रीय प्रादेशिक कार्यालय हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित है। इनमें से मरु प्रादेशिक केन्द्र का कार्यालय जोधपुर में झालामंड पाली रोड पर स्थित है।

राजस्थान व गुजरात क्षेत्र में प्रणियों पर अध्ययन
मरु प्रादेशिक केन्द्र जोधपुर की स्थापना 1960 में हुई थी। इस कार्यालय का कार्य क्षेत्र राजस्थान और गुजरात राज्यों में प्राणि जाति पर अध्ययन करना है। इसके अन्तर्गत प्रणियों की विभिन्न प्रजातियों की खोज, वर्गीकरण, पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर विस्तार आदि पर शोध करना है। इससे प्राप्त व संकलित आंकड़ों के आधार पर पाई जाने वाली प्रजातियों के संरक्षण में योगदान प्राप्त होता है। यहां के वैज्ञानिकों ने राजस्थान और गुजरात के विभिन्न उद्यान, अभयारण्य सहित इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों पर शोध कार्य किए हैं।

कार्यालय में है संग्रहालय और पुस्तकालय
जेडएसआई जोधपुर के प्रभारी अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि यहां से करीब 800 शोध पत्र, 10 फौना वॉल्यूम, 26 पुस्तकें, 20 मोनोग्राफ और कई पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित हुए हैं। कार्यालय में स्थित पुस्तकालय में जीव, जन्तुओं पर 5 हजार से अधिक पुस्तकें और शोध पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध हैं। कार्यालय में परिरक्षित व चर्मपूर्ण जीवों के लिए एक संग्रहालय भी है। इसमें जीव-जन्तुओं को देखने और इनके बारे में जानकारी के लिए छात्र, शोधार्थी आदि आते रहते हैं।

अभी इन पर हुआ है कार्य
भारतीय प्राणि सर्वेक्षण के मरु प्रादेशिक केन्द्र जोधपुर की ओर से हाल में चंबल नदी एवं अभ्यारण्य के सूखे घास के मैदानों के वन्य जीव, गुजरात के कच्छ जैव मंडल, बीकानेरजैसलमेर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना से छोड़े जाने वाले पानी से बने जलाशयों में मतस्य पर अनुसंधान पर शोध कार्य हुए हैं।

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