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बड़ा झटका: राजस्थान हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट की जमानत याचिका खारिज की, पत्नी को भी नहीं मिली राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट को बड़ा झटका दिया है। उनकी तरफ से दायर याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। पत्नी और सह आरोपी को भी राहत नहीं मिली।

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Vikram Bhatt

फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट (फाइल फोटो)

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माण से जुड़े करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में मुंबई निवासी फिल्म निर्माता विक्रम पी. भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी वी. भट्ट तथा सह-आरोपी महबूब अंसारी को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी की एकल पीठ ने तीनों आरोपियों की ओर से दायर अलग-अलग जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मामले में जांच अभी जारी है और इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है।

करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप

पूरा मामला उदयपुर जिले के भूपालपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज एफआइआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्डिया की ओर से आरोप लगाया गया कि मुंबई के फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट के साथ 24 मई 2024 को चार फिल्मों के निर्माण के लिए लगभग 47 करोड़ रुपए का समझौता किया गया था। इसके बाद इंडिका एंटरटेनमेंट एलएलपी के माध्यम से अलग-अलग चरणों में 42 करोड़ रुपए से अधिक की राशि विभिन्न वेंडर्स के नाम पर भुगतान करवाई गई।

डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि रुपयों के भुगतान के बावजूद एक ही फिल्म रिलीज हुई। दूसरी अधूरी छोड़ दी गई और तीसरी मात्र करीब 25 प्रतिशत ही बन पाई और चौथी फिल्म की शूटिंग आज तक शुरू ही नहीं हुई। शिकायत के अनुसार, इसके बावजूद विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट की ओर से लगातार दबाव बनाकर पहले करीब 8-9 करोड़ रुपए और बाद में लगभग 11 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग की गई।

फिल्म से जुड़ी संपत्ति देने से इनकार

आरोप है कि राशि नहीं मिलने पर शूटिंग रोक दी गई और फिल्म से जुड़ी संपत्तियां जैसे रॉ फुटेज, हार्ड डिस्क, म्यूजिक मास्टर फाइल, कॉस्ट्यूम, स्क्रिप्ट और आईपीआर लौटाने से भी साफ इनकार कर दिया गया।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मामला मूलतः व्यावसायिक लेनदेन से जुड़ा है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है। यह भी कहा गया कि दो फिल्में पूरी की जा चुकी थीं और बाकी फिल्मों का काम शिकायतकर्ता की ओर से भुगतान नहीं होने के कारण रुका।

गंभीर आर्थिक अपराध का मामला

वहीं, राज्य सरकार और परिवादी पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है, जांच अभी अधूरी है और यदि आरोपियों को रिहा किया गया तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ जांच अभी शेष है और इस स्तर पर जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।

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