
Jodhpur News: बोरानाडा स्थित न्यू महालक्ष्मी टिम्बर फैक्ट्री की दीवार के सहारे करीब 10 झुग्गी झोपड़ियां बनी हुई थीं, जिसमें पास ही स्थित मोतीलाल जाट की फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक रहा करते थे। ये श्रमिक कोटा, प्रतापनगढ़, चित्तौड़गढ़ और मध्यप्रदेश के राजगढ़ के रहने वाले हैं, जो मजदूरी के लिए यहां हुए हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर मजदूरी करते हैं। आमतौर पर तिरपाल से ढकी इन झोपड़ियों में 5-7 मजदूर ही निवास करते थे, लेकिन रविवार को अमावस्या होने से मजदूरों की छुट्टी थी।
ऐसे में उनके परिवार और रिश्तेदार भी रहने के लिए इन झोपड़ियों में आ गए। उन्हें क्या पता था कि अमावस्या की छुट्टी की रात जिंदगी में अंधेरी रात बनकर आएगी। दीवार के नीचे दबने से कोटा के खुमला जागीर निवासी सुनीता (32) की मौत हो गई। सुनीता अपने पति दिनेश (34) के साथ रहकर मजदूरी करती थी। बीती रात दोनों एक ही झोपड़ी में थे और दोनों दीवार के मलबे के नीचे दब गए। सुनीता और दिनेश दोनों को एम्स ले जाया गया, जहां सुनीता ने दम तोड़ दिया। दिनेश घायल है। उसका इलाज चल रहा है।
जोधपुर के न्यू महालक्ष्मी टिम्बर फैक्ट्री में 5 फीट ऊंची पुरानी दीवार थी। हाल ही में उस पर नई 12 फीट की दीवार खड़ी कर दी गई। दीवार की लम्बाई 70 फीट थी। इस पूरी दीवार के सहारे झुग्गी झोपड़ियां थी, जिसमें काम करने वाले मजदूर महालक्ष्मी टिम्बर के नहीं थे।
फैक्ट्री में पानी के दो सेफ्टी टैंक भी है। बीती रात तेज बारिश के समय दोनों सेफ्टी टैंक भर गए और पानी दीवार के पास फैलने लगा। पुरानी दीवार होने से पानी ने दीवार को काट दिया। दीवार टेढ़ी और कुछ ही देर में 70 फीट लम्बी और 17 फीट ऊंची दीवार ने झोपड़ियों पर गिरकर तबाही मचा दी।
सुबह 3 से 4 बजे का समय था। दीवार गिरने से झोपड़ियों में सो रहे मजदूर और उनके बच्चे दब गए। चारों तरफ चीत्कार मच गई। कई मजदूर दब गए। जिन पर मलबा कम गिरा था, वे साथियों के रेसक्यू में लग गए। अंधेरा होने से काफी परेशानी हुई। कुछ देर बाद बोरानाडा पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ टीम जेसीबी के साथ पहुंची, जिनकी लाइट में रेसक्यू किया गया।
Published on:
06 Aug 2024 09:58 am
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