
Rape with Minor
जोधपुर . बासनी क्षेत्र में किराये के मकान में रहने वाले युवक ने छह साल की बालिका से दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बासनी थाना पुलिस के अनुसार उत्तरप्रदेश का श्रमिक परिवार किराये पर रहता है। छह साल की बालिका का पिता कमठा मजदूरी करता है। मां फैक्ट्री में मजदूरी करती है। उत्तरप्रदेश निवासी मुकेश उर्फ मुकलेश (21) रहता है। बालिका शनिवार को घर में अकेली थी। आरोप है कि उसने बालिका से दुष्कर्म किया। मां मजदूरी से लौटी, तो आरोपी उसे धक्का देकर भाग गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पीडि़ता का एम्स में उपचार करवाया गया। पुलिस ने बालिका के पिता की रिपोर्ट पर रविवार रात पॉक्सो के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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लोग चाहते हैं कि सजा मिले
जोधपुर में आसाराम मामले को सजा मिलने के बाद नाबालिग बच्चों से यौन दुराचार करने वाले दुराचारियों को सजा मिलने को लेकर लोग अभी भी गुस्से में है और वे दुराचारियों को सजा देने के पक्ष में हैं। आम जनता की इसी मंशा के अनुरूप अब नाबालिग बच्चों के साथ दुराचार करने वाले किसी भी तरह बख्शे नहीं जाएंगे। जहां एक ओर केंद्र सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म पर फांसी की सजा का कानून बनाया है, वहीं राजस्थान में भी बच्चों के साथ दुराचार करने वालों के खिलाफ कानून बना हुआ है। यानी एेसा करने वाले दरिंदों की किसी तरह से खैर नहीं है।
ये दिशानिर्देश राजस्थान में लागू
राजस्थान बाल अधिकारिता निदेशालय ने नाबालिग बच्चों के साथ दुराचार के प्रकरणों के बारे में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर रखी है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने सन 2013 में इस आशय की अधिसूचना जारी की थी। ये दिशानिर्देश राजस्थान में लागू हैं। इस गाइडलाइन को राजस्थान गाइडलाइन्स फॉर प्रिवेन्शन ऑफ चाइल्ड एब्यूज 2013 के नाम से जाना जाता है। ये दिशा निर्देश पूरे राजस्थान में मान्य हैं और इन्हें बाल अधिकारों के विस्तार के रूप में देखा जाता है। इसमें 'राजस्थान किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) नियम 2000 के नियम 31 व 60 (1) की अनुपालना में विभिन्न संस्थाओं में बच्चों के साथ दुव्र्यवहार, शोषण और उपेक्षा से बचाव शामिल है।
यह है गाइडलाइन
इन गाइडलाइन्स को बाल अधिकार संरक्षण के परिप्रेक्ष्य मेंजरूरत होने पर लागू किया जा सकता है। इसके तहत द जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट 2013 और बालवय में सेेक्सुअल हमले के कानून प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेज पोक्सो एक्ट 2012 के दृष्टिगत संरक्षण प्रदान करना है। इसका अर्थ बच्चों के सर्वोत्तम हित से उनके शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक, सामाजिक और नैतिक विकास से तात्पर्य है।
गाइडलाइन में यह है प्रावधान
-यहां बच्चे शब्द का अर्थ 18 साल से छोटा कोई भी व्यक्ति हो सकता है।
-चाइल्ड एब्यूज का अर्थ किसी भी प्रकार का दुराचार करना या दुराचार के लिए प्रवृत्त करना है, जिसमें यौन शोषण व
भावनात्मक दुराचार अथवा किसी भी प्रकार का शोषण शामिल है।
-बच्चों के यौन शोषण का अर्थ समय-समय पर परिवर्तित पोक्सो एक्ट 2012 के तहत उनका यौन अपराधों से संरक्षण शामिल है।
-भावनात्मक दुराचार से तात्पर्य व्यक्तियों द्वारा बच्चे की जिम्मेदारी, अधिकारिता या भरोसा तोडऩा है। इसमें बच्चे को किसी प्रकार के संकट में डालना, उसे गंभीर दुव्र्यवहार संज्ञानात्मक, भावनात्मक या मानसिक आघात पहुंचाना भी इसी श्रेणी में आता है।
Published on:
30 Apr 2018 04:14 pm
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