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Creative video : Jodhpuri coat राष्ट्रीय पोशाक और भारत की शान का प्रतीक

जोधपुर.जोधपुर में ( jodhpuri coat ) और जोधपुरी सूट ( jodhpuri suit ) डिजाइन करने वाले कई डिजाइनर और टेलर हैं। आइए जानते हैं पेश है उनमें से जोधपुरी कोट बनाने के एक एक्सपर्ट रामस्वरूप पंवार से बातचीत और जोधपुरी कोट की खासियत। इसे बनाने की कहानी लाइव खास आपके लिए :

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जोधपुर

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MI Zahir

Apr 15, 2019

एम आई जाहिर.जोधपुर. आम तौर पर लिबास कई डिजाइन और स्टाइल के होते हैं, लेकिन ऐसे लिबास बहुत कम होते हैं जो सरलता और सहजता के साथ साथ फैशन का पुट लिए होते हैं। वो लिबास जिनमें सौम्यता और सादगी के साथ- साथ एक तरह की शान भी नजर आती है। जोधपुरी कोट ( jodhpuri coat ) और जोधपुरी सूट ( Jodhpuri suit ) ऐसे ही लिबास हैं। जोधपुर में जोधपुरी सूट डिजाइन करने वाले कई डिजाइनर और टेलर हैं। आइए जानते हैं पेश है उनमें से जोधपुरी कोट बनाने के एक एक्सपर्ट रामस्वरूप पंवार से बातचीत और जोधपुरी कोट की खासियत और इसे बनाने की कहानी लाइव खास आपके लिए :

सर प्रताप ने डिजाइन किया था जोधपुरी सूट
जोधपुर में नई सड़क पर जोधपुरी सूट के एक्सपर्ट साठ वर्षीय रामस्वरूप पंवार ने बताया कि जोधपुरी सूट बनाने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। एक बार मारवाड़ के पूर्व राजघराने से जुड़े जोधपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर प्रताप इंग्लैण्ड गए तो वहां उनके कपड़े खो गए थे। उन्होंने कपड़ा अपने हाथ से कटिंग कर डिजाइन किया। इस तरह एक नये तरह का शानदार सूट तैयार हो गया। वहां लोगों ने उनसे पूछा कि यह क्या है तो कहा, जोधपुरी कोट, जोधपुरी ट्राउजर। इस तरह जोधपुरी सूट के रूप में एक नया लिबास प्रचलन में आया।

यहां 25 कारीगर बनाते हैं जोधपुरी सूट
जोधपुरी सूट डिजाइनर रामस्वरूप पंवार ने बताया कि उनके यहां पीढ़ी दर पीढ़ी जोधपुरी सूट बनाने का काम होता है। उनका परिवार दो सौ साल से यह काम कर रहा है। पहले उनके दादा उदयराज पंवार, उसके बाद पिता मूलराज पंवार और अब वे स्वयं यह काम कर रहे हैं। उनके पास कुल 25 कारीगर हैं और वे सब मिल कर जोधपुरी सूट बनाते हैं।

सूट बनाने में दो दिन लगते
उन्होंने बताया कि एक जोधपुरी सूट बनाने में दो दिन लगते हैं। यह सूट चार मीटर कपड़े में 2 दिन में तैयार होता है। क्यों कि एक कोट बनाने में दो मीटर कपड़ा लगता है। इसी तरह बिरजिस या जोधपुरी पेंट बनाने में भी 2 मीटर कपड़ा लगता है। इस पेंट को पोलो पेंट भी कहते हैं। जोधपुरी कोट का गला बनाना बड़ा ही कारीगरी का काम है। पंवार ने बताया कि उनके कारीगर बाबूलाल राठौड़ जोधपुरी कोट का गला बनाने के एक्सपर्ट हैं। वहीं करीमबख्श तो जोधपुरी सूट बनाने के इतने अच्छे कारीगर हैं कि वे 5-6 साल तक रूस रह कर आए हैं।

आन बान और शान का प्रतीक
उन्होंने बताया कि जोधपुरी कोट और जोधपुरी सूट ऐसे लिबास हैं जो आज भारत की शान का प्रतीक हो गए हैं और इसे राष्ट्रीय पोशाक की सी हैसियत हासिल है। हर राष्ट्र प्रमुख और नेता ही नहीं, राजघरानों से जुड़े लोग और अभिनेता भी इसे पहन कर खुद को धन्य समझते हैं। आज भी बड़ी या शाही शादियों में जोधपुरी कोट या सूट पहना जाता है। आजकल शादियों में आम आदमी भी कम से कम शादी में तो जोधपुरी सूट सिलवाने को प्राथमिकता देता है।


जोधपुरी कोट और सूट पहनने के शौकीन
उन्होंने बताया कि देश में कई हस्तियां जोधपुरी कोट और सूट पहनने के शौकीन रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जोधपुरी सूट पहनने केशौकीन रहे हैं। आज किक्रेटर कपिलदेव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फिल्म अभिनेता रणवीरसिंह, पूर्व राज्यसभा संासद गजसिंह ( former MP gaj singh ) और जोधपुर के पोलो खिलाड़ी शिवराजसिंह भी यह सूट पहनते हैं। किसी जमाने में आनंद सिनेमा के पास रहने वाले अर्जुनलाल पंवार मारवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्यों के जोधपुरी सूट बनाते थे।

राजीव गांधी के लिए जोधपुर में बनता था
जोधपुरी सूट, गरिमा, मर्यादा और सौम्यता का प्रतीक राष्ट्रीय लिबास है। यह कोट या सूट पहनना लोग अपनी शान समझते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ( Rajiv Gandhi ) का जोधपुरी सूट तो जोधपुर से सिल कर जाता था और वह वही पहनते थे। सांसद रहने के दौरान अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot ) जोधपुर के देवीलाल शर्मा से यह सूट सिलवा कर नई दिल्ली भेजते थे।