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जोधपुरी जायके में रस घोल रही मलाई रोटी

- संयोगवश बना मिष्ठान आज लोगों की जुबान पर

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बासनी (जोधपुर). रोटी का नाम आते ही आमतौर पर आदमी के मन में एक साधारण व गोल रोटी का ख्याल आता है जिसे सब्जी के साथ खाया जाता है। वहीं जोधपुर के लोग अपने स्वाद के साथ कई प्रयोग करते रहे हैं। ऐसी ही स्वाद से लजीज है यहां की मलाई रोटी। रोटी के समान गोल लेकिन इसमें केवल मलाई है, एक बार खा लिया तो मन तृप्त हो जाता है। एक मलाई रोटी इतनी भारी कि खा लिया तो स्वाद कई घंटों तक मुंह से नहीं जाता। ऊपर से इस पर लगा हुआ जावेत्री-जायफल, बादाम पिस्ता, पीसी हुई इलायची और केसर मिलकर इसके स्वाद को और भी बढ़ा देते हैं। वहीं यह भी कहा जाता है कि यह केवल हमारे जोधपुर में ही बनती है।

ऐसे बनती है मलाई रोटी
मलाई रोटी को बनाने के लिए करीब 10 किलो दूध को दो किलो रहने तक रड़ाया जाता है। इसके बाद कढ़ाई पर ही इसको छोटे-छोटे भागों में काट दिया जाता है। काटने के बाद मलाई को सांचे से आकृति प्रदान की जाती है। इसमें शक्कर की चासनी मिलाकर इसको बादाम, पिस्ता व केसर लगाकर सजाया जाता है। यह मिठाई भीतरी शहर के कटला बाजार अचलनाथ मंदिर के पास बनती है। यह प्रति पीस करीब 75 रुपए के भाव से मिलती है।

ऐसे बनी मलाई रोटी
आज से 30 साल पहले किसी दूसरी मिठाई को तैयार करने के लिए कढ़ाई में दूध रड़ाया जा रहा था। अचानक कोई जानवर आया तो जवरीलाल भाटी ने प्याली मारी तो वो कढ़ाई के जाकर चिपक गई। प्याली हटाई तो रोटी की आकृति बन गई। उसमें चासनी डालकर प्रयोग किया तो एक बेहद स्वादिष्ट मिठाई बनकर तैयार हो गई। इसे पहले एक ठेले पर बेचा जाता था, बाद में यहां रेस्टोरेंट लगा दिया। अब यहां मलाई रोटी खानेे के लिए शहरवासियों की भीड़ उमड़ती है। विजय भाटी ने बताया कि इस मिठाई को बनाने के लिए प्रतिदिन एक आदमी सुबह 10 बजे लगता है जो करीब ढाई-तीन घंटे की मेहनत के बाद मलाई रोटी तैयार करता है। हर रोज इसके सिर्फ 30 पीस बनाए जाते हैं।
कंटेंट साभार- फेसबुक पेज- 'जोधपुर की गलियां।


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