जोधपुर. सरहद की लकीरें खिंचने और दो मुल्क बनने के बाद भी अवाम का अपनी जमीन और अपने पुरखों और रिश्तेदारों से जुड़ाव कायम है। भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस दोनों देशों के नागरिकों को मिलवाने में अहम किरदार निभा रही है। थार एक्सप्रेस रविवार को जोधपुर भगत की कोठी रेलवे स्टेशन पहुंची। तड़के इस ट्रेन में आए करीब 325 यात्री अपने रिश्तेदारों से मिल कर बहुत भावुक और खुश नजर आए।
थार एक्सप्रेस का सफर
ध्यान रहे कि थार एक्सप्रेस एक अंतरराष्ट्रीय रेलगाड़ी है, जो पाकिस्तान में कराची और भारत में जोधपुर शहर को आपस में जोड़ती है। भारत के मुनाबाव और पाकिस्तान के खोखरापार के बीच छह किलोमीटर की दूरी है। ये भारत और पाकिस्तान में अंतिम सीमांत स्टेशन हैं। इन दो देशों के बीच चलने वाली ये सबसे पुरानी रेल सेवा है। यह रेल सेवा 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद पटरियाँ क्षतिग्रस्त होने के कारण रोक दी गई थी, जिसे 41 साल बाद 18 फरवरी 2006 को फिर से शुरू किया गया था।
329 किलोमीटर की दूरी
कराची पहुंचने से पहले यह रेल सेवा अपनी यात्रा के दौरान जमराव, सैंदद, पिथारू ढोरो नारो, छोरे और खोखरापार स्टेशनों से होकर गुजरती है। कस्टम और इमिग्रेशन से सम्बन्धित कागजात की जांच भारत में बाड़मेर और पाकिस्तान में मीरपुर खास स्टेशनों पर की जाती है। यह ट्रेन 329 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
नहीं आ सका रेशमा का शव
इसी ट्रेन से बाड़मेर के सीमावर्ती अगासडी गांव की 65 वर्षीय महिला रेशमा का शव पाकिस्तान से भारत लाया जाना था, लेकिन रेशमा की वीजा अवधि समाप्त हो जाने से उसका शव नहीं लाया जा सका। रेशमा के परिजनों ने शव को ट्रेन से मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर उतारने के लिए विशेष अनुमति भी ली थी, लेकिन उसका शव नहीं लाया जा सका। अब उसके परिजन उसका शव सड़क मार्ग से लाने का प्रयास कर रहे हैं।