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साथीन के काला-गोरा भैरूजी मेले में उमड़े श्रद्धालु, पूरी होती है संतान सुख की कामना

पीपाड़सिटी पंचायत समिति क्षेत्र के साथीन गांव के काला-गोरा भैरू जी नि:संतान दम्पतियों के लिए एक मात्र उम्मीद के रूप में पहचाने जाते हैं।

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Kala-Gora Bhairuji fair in Sathin

साथीन के काला-गोरा भैरूजी मेले में उमड़े श्रद्धालु, पूरी होती है संतान सुख की कामना

पीपाड़सिटी (जोधपुर). पंचायत समिति क्षेत्र के साथीन गांव के काला-गोरा भैरू जी नि:संतान दम्पतियों के लिए एक मात्र उम्मीद के रूप में पहचाने जाते हैं। साथीन के बावड़ी मंदिर में भैरूजी की विशेष पूजा अर्चना के समय संतान सुख की मांगी गई मनोकामना पूरी होने से इनके प्रति ग्रामीणों की आस्था वर्षों बाद भी जारी है।


जानकारों के अनुसार विवाह के कई वर्ष बाद भी संतान नही होने पर दम्पती संयुक्त रूप से काला-गोरा भैरूजी के दर्शन करने आते हैं और बावड़ी मंदिर में संतान सुख की कामना के साथ इसके पूरा होने पर मोड़बन्द जात लगाते हैं। इसमें दम्पती विवाह के समय पहनी गई पोशाक को पहनकर मेले में दर्शन के लिए आते हैं।


हालांकि आज के वैज्ञानिक युग मे फर्टिलिटी, बेबीट्यूब व अन्य सुविधाओं से संतान सुख प्राप्त किया जा सकता हैं। लेकिन अशिक्षित या साक्षर ग्रामीणों की उम्मीद आज भी काला-गोरा भैरूजी पर टिकी हुई है। इसके चलते ही मेले की अवधि में नि:सन्तान दम्पतियों का भैरू के दरबार मे हाजरी लगाने की परम्परा आज भी कायम हैं।


मेले में उमड़ा सैलाब
साथीन में तीन दिवसीय मेले के दूसरे दिन ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ा रहा। पूरे दिन महिलाएं हाट बाजार में अपनी सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री खरीदती दिखी। वहीं किसान पृष्ठ भूमि के लोगों का रुझान कृषि के हाथ काम के यंत्र खरीदने में व्यस्त रहे। मेला स्थल और बावड़ी मंदिर में पूरे दिन भैरूजी की महिमा के लोक गीत श्रद्धालुओं की जुबान पर चढ़े रहे इसके साथ ही फाग गीतों का दौर भी इस मेले के साथ शुरू होता दिखा। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और मजदूर वर्ग में अमावस्या को कार्य नहीं कर अवकाश रखने की परम्परा के चलते दूरस्थ ग्रामों से ग्रामीण श्रद्धालु परिवार के साथ मेले का आनंद लेते रहे।


सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध
भैरूजी के मेले को देखते हुए पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए। सहायक उप निरीक्षक पुखराज मीणा के साथ दो महिला सिपाही सहित दस जवानों को तैनात किया गया हैं इसके साथ पुलिस के दो वाहन भी दिन और रात्रि गस्त में लगाए गए।

सरपंच गोपाल कंवर ने मेला समिति के सदस्यों के साथ व्यवस्था का अवलोकन किया। केंद्रीय भू-जल बोर्ड कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामनिवास कुडिय़ा, पूर्व सरपंच बाबूलाल लीलड़ सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी बावड़ी मंदिर में दर्शन कर क्षेत्र में खुशहाली की कामना की। मेले का समापन मंगलवार को होगा।