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द्वापर युग के संयोग में मध्यरात्रि जन्मेंगे कान्हा

  रोहिणी नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, घरों और मंदिरों में जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियां शुरू

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द्वापर युग के संयोग में मध्यरात्रि जन्मेंगे कान्हा

द्वापर युग के संयोग में मध्यरात्रि जन्मेंगे कान्हा

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव जन्माष्टमी पर्व में ही एक दिन ही शेष हैं। ऐसे में मंदिरों में सजावट व रोशनी के साथ ही घरों में भी भगवान कृष्ण के स्वागत की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इस बार भी ग्रह-नक्षत्रों के अनूठे योग से श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग के समय बने दुर्लभ संयोगों में होगा। सूर्यनगरी के सभी प्रमुख कृष्ण मंदिरों में पुजारियों की ओर से कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां आरंभ हो गई है। राज्य सरकार की गाइडलाइन के तहत मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए बंद रहेंगे। जन्माष्टमी पर शहर के विभिन्न हिस्सों में होने वाली 'कान्हा मटकी फोड़ प्रतियोगिताÓ इस बार भी कोविड प्रोटोकॉल के तहत नहीं हो सकेगी।

यहां होंगे विशेष शृंगार और मनोरथ
कटला बाजार कुंज बिहारी मंदिर, जूनी धान मंडी गंगश्यामजी मंदिर व बालकृष्ण लाल मंदिर, शास्त्रीनगर सी सेक्टर कृष्ण मंदिर, सरदारपुरा रानीजी का मंदिर, रातानाडा कृष्ण मंदिर, सरदारपुरा सातवी रोड स्थित सत्संग भवन,गीता भवन, सिवांचीगेट-द्वारकाधीश मंदिर में पुजारियों की ओर से ऋतुपुष्पों का विशेष शृंगार किया जाएगा। चौपासनी स्थित श्याममनोहर प्रभु मंदिर में परम्परागत रूप से मनोरथ किए जाएंगे। कोविड गाइडलाइन की पालना के कारण भक्तों का प्रवेश नहीं हो सकेगा। सालावास रोड तनावड़ा फांटा स्थित इस्कॉन के राधागोविंद मंदिर में डिजिटल ऑनलाइन कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा।

द्वापर युग सा दुर्लभ संयोग
श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। इस बार सोमवार को अष्टमी तिथि के साथ ही सुबह 6.39 से अगले दिन सुबह 9.44 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा सर्वार्थसिद्धि योग के साथ ही इस दिन चंद्रमा वृष राशि में रहेगा। इसके साथ ही मध्यरात्रि में सभी नौ ग्रह केंद्र त्रिकोण का योग बनाएंगे। यह संयोग आमजन के साथ ही व्यापारी वर्ग के लिए श्रेष्ठ साबित होगा। चंद्रमा के केंद्र त्रिकोण में स्थित होने से द्वापर युग सा दुर्लभ संयोग बनेगा। इसके अलावा इस बार भगवान के जन्म के समय चंद्रमा और बुध उच्च राशि में तथा सूर्य और शनि स्वराशि में रहेंगे।

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