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hanuman jayanti: जानिए क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती

यूं पड़ा हनुमान नाम

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hanuman jayanti: जानिए क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती

hanuman jayanti: जानिए क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती



जोधपुर.

इंद्र ने हनुमान जी के शरीर को वज्र के समान कठोर होने का आशीर्वाद दिया। जिस दिन हनुमान को दूसरा जीवन मिला, उस दिन चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि थी, इसलिए हर साल चैत्र पूर्णिमा को भी हनुमान जयंती के तौर पर मनाया जाता है। वज्र का प्रहार हनुमान जी की ठोढ़ी पर हुआ था, ठोढ़ी को हनु भी कहा जाता है।


ये भी हैं हनुमानजी से जुड़ी हुई बात
द्वापर युग में एक बार हनुमान जी जब रामेश्वरम तीर्थ के पास श्री राम के ध्यान में लीन थे तब अर्जुन वहां से गुजर रहे थे। उनकी मुलाकात अर्जुन से हुई। मुलाकात के दौरान अर्जुन ने उनसे पूछा कि राम और रावण के युद्ध के समय उन्होंने पत्थरों के सेतू की बजाय बाणों का सेतु क्यों नहीं बनाया। बाणों का सेतु आसानी से और जल्दी बन जाता। इस पर हनुमान जी ने अर्जुन से कहा कि बाणों का सेतु कमजोर होता और वह वानरों का भार सहन नहीं कर पाता। हनुमान जी के इस उत्तर पर अर्जुन हंसने लग गए। अर्जुन को अपने धनुर्धर होने का बड़ा अभिमान था। उसने उन्होंने कहा कि वह स्वयं अभी बाणों का सेतु बना कर दिखाता है।
अर्जुन ने Hanuman Ji से कहा कि अगर वह उनके बनाए बाणों के सेतू पर चल कर दिखा देते हैं और सेतू टूट जाता है तो वह अग्नि समाधि ले लेगा। हनुमान जी ने हामी भर दी। अर्जुन ने कुछ ही देर में पास िस्थत सरोवर पर बाणों का सेतु बना दिया। हनुमान जी तब तक भगवान राम के ध्यान में लीन थे। जैसे ही बाणों का सेतु तैयार हुआ, हनुमान जी ने विराट रूप धारण किया और सेतु पर चलने लगे। पहला पांव रखने से ही सेतू डगमगाने लग गया। दूसरा पांव रखते ही पूरा सेतु टूटकर सरोवर में गिर गया। यह देख अर्जुन दुखी हो गए और उन्होंने समाधि के लिए अग्नि जला ली। जैसे ही अर्जुन अग्नि की ओर बढ़ने लगा, तब श्रीकृष्ण प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि यह उनकी ही लीला थी। अर्जुन ने तब Hanuman Ji से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहा की वह बहुत बड़े धनुर्धर है लेकिन कई बार अहंकार के कारण व्यक्ति अपना सब कुछ खो बैठता है। इसके बाद हनुमान जी ने महाभारत युद्ध के समय उनके रथ के शिखर के ऊपर बैठने की बात कही।