
जोधपुर में शेरनी के शावकों ने मां से मांगी ममता, मिली मौत
जोधपुर.
माचिया जैविक उद्यान में जूनागढ़ से लाई गई मादा एशियाटिक लॉयन 'आरटीÓ के दोनों शावकों की मौत सोमवार को हो गई। पांच दिन पहले 27 जून को शेरनी 'आरटीÓ ने एक साथ दो शावकों को जन्म दिया था। शावकों को जन्म देने के बाद मातृत्व भाव का अभाव रहा। प्रसव के बाद शावकों के साथ जैसा केयर मां को करना चाहिए वैसा नहीं हो पाया। दोनों ही शावकों को दूध नहीं पिलाने के कारण वन्यजीव चिकित्सक व वनविभाग के केयर टेकर स्टाफ ने शावक को डिहाइड्रेशन से बचाने के प्रयास शुरू किए। लॉयन व्यवहार विशेषज्ञों व वन अधिकारियों की सर्वसहमति के बाद मां की ममता से वंचित दोनों लॉयन शावकों को शनिवार रात शेरनी आरटी के पास छोड़ा गया। पहले दिन शेरनी ने शावकों के प्रति कोई रूचि नहीं ली। रविवार रात को वही प्रक्रिया पुन: दोहराई जाने के दौरान शेरनी की अज्ञानता के कारण शावक उसके शरीर के नीचे दब गए। सोमवार सुबह जब केयर टेयर राजेश बारासा ने देखा तो एक शावक की हलचल बंद थी। दोनों ही शावकों को तुरंत बाहर निकाला गया लेकिन तब तक एक की मौत हो चुकी थी। दूसरे शावक को एक निजी अस्पताल के इंटेसिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया लेकिन उसके भी अंदरूनी घाव होने के कारण नहीं बचाया जा सका।
पहले भी काल के ग्रास बन चुके है शावक इससे पहले लॉयन 'आरटीÓ ने 19 अक्टूबर 2017 को दो शावकों को जन्म दिया। मुंह में गलत तरीके से पकडऩे की वजह से एक नर शावक की जन्म के कुछ देर बाद ही मौत हो गई थी। इसी तरह 12 मई 2017को शेरनी आरटी ने दो शावकों को जन्म देने के बाद शावकों को मुंह में दबाए घूमना शुरू कर दिया था। शेरनी के दांत एक शावक की चमड़ी के आर पार होकर शरीर के भीतर तक धंस जाने से पिंजरे में ही मौत हो गई। दूसरे शावक को शेरनी आरटी से अलग कर बचाया गया। इससे पहले भी शेरनी आरटी ने 22 अक्टूबर 2016 को तीन शावकों को जन्म दिया था जिनमें दो शावकों की मौत हो गई और तीसरे शावक को मां से अलग कर बचाया गया। मां की ममता से वंचित बचे तीनों शावक क्रमश: 'कैलाश Ó, 'रियाज Ó और 'लक्ष्मी Ó का पालन पोषण वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह की देखरेख में किया गया।
चिकित्सक का कहना है
पांच दिन पूर्व जन्में दोनों ही शावकों के शरीर पर शेरनी के दांत के निशान नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी छोटी आंत के घाव और फूटी हुई थी। संभवत: शेरनी के भारी भरकम शरीर के नीचे दबने से शावकों की घुटन से मौत हो गई थी। पूर्व में भी तीन बार प्रसव के दौरान शावकों को जन्म देने के बाद शेरनी आरटी शावकों को अपनी ममता की छांव वंचित रखा था।
डॉ. श्रवणसिंह राठौड़, वन्यजीव चिकित्सक ,माचिया जैविक उद्यान जोधपुर
Published on:
2 Jul 2018, 10:57 PM IST
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