
lion love
करवा चौथ के दिन बुधवार को जोधपुर के माचिया बायलॉजिकल पार्क के बब्बर शेर को कई बरसों बाद आखिर अपना लेडी लव फिर मिल गया। वन विभाग की टीम कोटा के चिडि़याघर से शेरनी गौरी को जोधपुर ले आई। लव के जीवन में अब खुशियां फिर से लौट आईं है। गौरी के आने के बाद माचिया में बब्बर शेर के दो जोड़े हो गए। पर्यटकों के लिए ये बूढ़ा शेर का जोड़ा और इनकी अठखेलियां आकर्षण का केंद्र होंगी।
उल्लेखनीय है कि सेंट्रल जू ऑथोरिटी (सीजेडए) नई दिल्ली के निर्देशानुसार एक बब्बर शेरनी कोटा के चिडि़याघर से जोधपुर के माचिया बायलॉजिकल उद्यान में लाना प्रस्तावित था। इसी आदेश के तहत जोधपुर वन्य जीव मंडल की टीम शेरनी गौरी (16) को बुधवार शाम यहां ले आई।
वर्ष 2006 में लव की साथिन रमा की संक्रमण से मौत हो गई थी, जिसके बाद लव जोधपुर जंतुआलय में एकाकी जीवन जी रहा था। हालांकि जोधपुर वन्य जीव मंडल ने लव के लिए कई बार मादा शेरनी को यहां लाने की कोशिश की, लेकिन वे प्रयास असफल ही रहे। लव अब 18 वर्ष का हो चुका है। करीब 13 वर्ष पहले लव को जोधपुर के उम्मेद उद्यान लाया गया था। इसके कुछ समय बाद उसे रमा का साथ मिला, लेकिन उसने भी जल्द ही लव को अलविदा कह दिया। लम्बे अरसे से अकेले रहने की आदत के चलते गौरी के साथ लव का व्यवहार कैसा रहेगा, ये देखना बेहद रोचक होगा। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गौरी के आने के बाद लव के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। उसका एकाकीपन दूर हो जाएगा।
बब्बर शेर जंगलों की तुलना में मानवनिर्मित पिंजरों में ज्यादा जीते हैं। यहां उन्हें संघर्ष नहीं करना पड़ता और दिन के हर पहर का भोजन भी सुलभता से उपलब्ध होता है। जबकि जंगलों में रोज शिकार नहीं मिलता और काफी संघर्षभरा जीवन होता है। बच्चों को भी दूसरे शिकारी जानवरों से बचाने की चुनौती होती है। एेसे में खुले वातावरण में बब्बर शेर औसतन 15 वर्ष ही जी पाते हैं।
Published on:
19 Oct 2016 06:34 pm
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