जोधपुर ( jodhpur news rajasthan news ). महाशिवरात्रि 2020 ( Mahashivratri 2020 ) पर शिवनगरी जोधपुर में हर तरफ महादेव की माया है। महाशिवरात्रि त्योहार ( Mahashivaratri Story ) का खूबसूरत माहौल है ( Shivratri wishes ) । शहर में ( Mahashivaratri 2020 date ) शिवालय सज गए हैं ( Shivratri greetings )। आइए बात करते हैं राजस्थान ( Maha Shivaratri 2020 in Rajasthan) में शिवालयों की नगरी जोधपुर के शिवालयों की ( Mahashivaratri Story in hindi ) । जोधपुर में तकरीबन 2000 शिव मंदिर हैं, लेकिन शहर के शिव भक्तों की नजर में ( Importance of mahashivratri in hindi ) अचलनाथ मंदिर ( Achalnath Mahadev Temple ) के प्रति अगाध श्रद्धा है (Latest NRI news in hindi ) । जोधपुर की महारानियों ने कई मंदिर बनाए, लेकिन उसमें अचलनाथ मंदिर को बहुत ही खास बहुत ही विशिष्ट स्थान प्राप्त है।
खूबसूरत आकर्षक फूलों से शृंगार
महाशिवरात्रि पर भगवान अचलनाथ की मूर्तियों का बहुत ही सुंदर आकर्षक फूलों से शृंगार किया गया है ( Mahashivaratri 2020 date in india ) । यह मंदिर ( Mahashivaratri 2020 date and day ) सुबह 4 बजे खुला और उसके बाद शायद ही कोई समय हो जब यहां कोई श्रद्धालु यहां न आते हों( Mahashivaratri 2020 time ) । रात 11 बजे मंदिर के कपाट बंद होने तक भक्तों का तांता लगा रहता है ( Shivratri pooja ) ।
प्यास बुझाने में भी काम आ रहा
सिरोही के राजा राव जगमाल की पुत्री नानक देवी जब मंदिर का निर्माण करवाया तो साथ ही बावड़ी का निर्माण भी करवाया था। जिसका जल आज भी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के लिए प्रयुक्त होने के साथ शहरवासियों की प्यास बुझाने में भी काम आ रहा है। मंदिर का जीर्णोद्धार करने वाले संत नेपाली बाबा और ऋ षि गिरि महाराज के बाद अब मुनीश्वर गिरी मंदिर के वर्तमान महंत हैं। जिनके मार्गदर्शन में मंदिर का विकास कार्य प्रगति पर है।
यह है रोचक कहानी
यह मंदिर जोधपुर के महाराजा राव गांगा की रानी नानक देवी ने विक्रम संवत 1588 जेठ सुदी पंचमी तद अनुसार 21 मई 1531 को बनवाया था। जब मंदिर बन रहा था, तब यहां पर प्राचीन शिवलिंग को अन्यत्र स्थानांतरित करने की कवायद की गई, लेकिन शिवलिंग वहां से हट नहीं सका और अचल रहा। इसलिए मंदिर का नाम अचलनाथ पड़ा।
पुराना है इतिहास
जोधपुर के कटला बाजार और कपड़ा बाजार के मध्य स्थित करीब 490 साल प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास भी बहुत पुराना है। बताया जाता है कि राव गांगा और उनकी पत्नी रानी नानका देवी ने यह मंदिर उन्हें संतान प्राप्ति के बाद बनाया था। शिवालय के जीर्णोद्धार के बाद मंदिर में दांयी तरफ अचलनाथ शिवलिंग और बांये नर्मदेश्वर शिवलिंग है। यहां माता पार्वती की प्राचीन मूर्ति भी है। मंदिर का शिखर करीब 52 फीट ऊंचा है और इसमें संगमरमर को तराश कर बनाई गईं मूर्तियां बहुत ही आकर्षक और खूबसूरत हैं। गर्भ ग्रह के आसपास राम-लक्ष्मण-सीता और राम भक्त हनुमान की संगमरमर की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। हर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
विकास कार्य नेपाली बाबा के समय
मंदिर का विकास कार्य नेपाली बाबा के समय वर्ष 1971 में शुरू हुआ, तब आठ लाख रुपए की राशि विकास पर खर्च की गई थी। उसके बाद 1995 में महंत ऋषि गिरी के सान्निध्य में मंदिर शिखर पर 65 किलो का कलश चढ़ाया गया था, जिसमें 17 तोले सोने की परत भी लगाई गई थी। भव्यता और अलंकरण की दृष्टि से अचलनाथ मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर के ठीक बीचोंबीच स्थित होने के कारण लोग इस मंदिर में नियमित रूप से आते हैं।