जोधपुर

मलाला यूसुफ जई जन्म दिन विशेष : हमारी मलाला हिना ने मन की आंखों से पाई मंजिल

आज नोबल पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित महिला अधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफ जई का जन्म दिन है। राजस्थान की हायर एजुकेशन हब सिटी जोधपुर में भी टेलेंट की कमी नहीं है। शहर की हिना कल्ला दृष्टिहीन होते हुए भी आरएएस की टे्रनिंग कर रही हैं। उनकी तरक्की से आज की पीढ़ी को यह संदेश मिलता है कि मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए।  

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Jul 11, 2018
Hina kalla

जोधप़ुर.मलाला यूसुफ जई की तरह हमारे राजस्थान की एक प्रेरक और संघर्षशील युवती है हिना कल्ला। वह जोधपुर की बेटी और यूथ आईकॉन है। भीतरी शहर के बनियावाड़ा की निवासी मध्यम वर्ग की मेधावी हिना ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा दृष्टिहीन श्रेणी में राजस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रचा है। अब वे जोधपुर के एसडीएम के अधीन आरएएस की फील्ड ट्रेनिंग कर रही हैं। यह ट्रेनिंग अब पूरी होने वाली है। उनका आई क्यू और विजन बहुत अच्छा है। जिन्दगी में दुश्वारियां आने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।हिना ने अपने संघर्ष और विकास के सफर पर पत्रिका से बात की।

सन २००६ में दृष्टि गंवाई, हौसला नहीं डिगा
हिना ने बताया, उसका २३ जनवरी १९८९ को जोधपुर में जन्म हुआ। सन २००६ में दृष्टि गंवा दी। तब वह सीनियर सैकण्डरी बोर्ड की परीक्षा नहीं दे सकी थी। उसके लिए यह बहुत ही दुखद और अपने अस्तित्व को हिला देने वाला हादसा था, लेकिन हौसला बनाए रखा। उसने मन में विश्वास, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के सबब वह तरक्की की मंजिलें तय करती गई। जब मंजिल मिल गईउन्होंने कहा, आंखों की रोशनी जाने के बाद भी मैंने आगे बढऩे और कुछ करने का अपना संकल्प मजबूत रखा और लक्ष्य से नहीं हटी। आरएएस की परीक्षा के लिए दिन रात मेहनत की थी। अपने जीवन का मकसद ध्यान में रखा और वह दिन भी आया, जब मंजिल मिल गई।


शिक्षकों के प्रेरक वाक्यों ने आसान की राह
हिना ने बताया, मैंने सन २००४ में बालिका आदर्श विद्या मंदिर शास्त्रीनगर से सन ७७ प्रतिशत से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की। इसके लिए मुझे गार्गी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मैंने सन २००६ में नेत्रहीन विकास संस्थान में पढ़ाई की। वहां कृष्णपालसिंह सिसोदिया सर ने कहा - सिविल सर्विसेज में ही जाना है। उनका यह वाक्य मेरे जीवन का ध्येय वाक्य बन गया। उसके बाद मैंने सन २००७ में हिन्दी, राजनीति विज्ञान और इतिहास विषय में ७० प्रतिशत अंकों के साथ सीनियर सैकण्डरी परीक्षा फस्र्ट डिविजन से पास की। एक और बात याद आती है, मैं मौलाना आजाद स्कूल परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रही थी, वहां एक अध्यापक ने मेरी कॉपी देख कर मुझसे कहा था-तुम आरएएस का एग्जाम देना। मैं आज उस टीचर का नाम तो नहीं जानती, लेकिन उस टीचर का यह वाक्य मेरे लिए प्रेरक बन गया।

कदम चूमती रही कामयाबी
उन्होंने अपनी तरक्की के सफर के बारे में बताया, मैंने सन २०१० में हिन्दी साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान, विषय के साथ कमला नेहरू कॅालेज से बीए और सन २०१३ में ६१ प्रतिशत अंकों के साथ राजनीति विज्ञान विषय में प्रथम श्रेणी से एमए किया। उसके बाद सन २०११ में ७९ प्रतिशत अंकों के साथ बीएड किया। उसके बाद वर्ष २०१३ में मैं द्वितीय श्रेणी शिक्षिका बनी। कुछ भी मुश्किल नहींहिना कल्ला ने बताया, मैंने गवर्नमेंट गल्र्स सीनियर सैकण्डरी स्कूल सिवांची गेट में पॉलिटिकल साइंस की लेक्चरर के रूप में सेवाएं दीं। स्कूल स्टाफ ने सहयोग किया और पढ़ाई करने का समय भी दिया। नौकरी लगने के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालना थोड़ा मुश्किल था। उनके सहयोग की वजह से आरएएस परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकाल मिला। जब मैं टीचर नहीं थी तो १२-१३ घंटे पढ़ाई करती थी और टीचर बन गई तो ७-८ घंटे ही पढ़ाई कर पाती थी। कम समय में ज्यादा पढ़ाई करना और अच्छे अंक लाना चैलेंज था, लेकिन मैंने रिकॉर्डेड मैटर से पढ़ती थी।

मीडिया ने संवारी मेरी जिन्दगी
उन्होंने बताया,मेरी जिन्दगी बनाने और संवारने में रेडियो व अखबार ने बड़ी भूमिका निभाई। मैं रोजाना ऑल इंडिया रेडियो के समाचार सुनती थी और पापा से अखबार की खबरें सुनती थी। इससे मुझे मदद बहुत मिली। इससे मेरा सम सामयिक घटनाचक्र और सामान्य ज्ञान का नॉलेज अच्छा खासा हो गया। आज भी ऑल इंडिया रेडियो के समाचार अवश्य सुनती हूं। मैं युवाओं से यही कहना चाहती हूं कि पढ़ाई के लिए लक्ष्य के प्रति समर्पण,एकाग्रता और कड़ी मेहनत जरूरी है।

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