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सगी जी रो नखरो पड़ गियो भारी, रुपिया पइसा ले गियो हीरे रो व्यापारी
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सगी जी रो नखरो पड़ गियो भारी, रुपिया पइसा ले गियो हीरे रो व्यापारी

जोधपुर. होली पर कुरीतियों व समसामयिकी घटनाओं पर प्रहार के लिए इस बार श्लील गाळी गायन के गेरिए पैसों के घोटाले के लिए नीरव मोदी पर व्यंग्य

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अभिषेक बिस्सा

जोधपुर .

भीतरी शहर में होली पर कुरीतियों व समसामयिकी घटनाओं पर प्रहार के लिए इस बार श्लील गाळी गायन के गेरिए पैसों के घोटाले के लिए नीरव मोदी पर व्यंग्य कसते नजर आएंगे। इस बार गेरिए अपने गेर में ‘सगी जी रो नखरो पड़ गियो भारी, रुपिया पइसा ले गियो हीरे रो व्यापारी गाते देखे जाएंगे। इस बार गेरों को लेकर शहर में तैयारियां शुरू हो गई है।


इस तरह के अंतरे मंडलेश्वर फाग की गेर में देखे जाएंगे। मंडलेश्वर फाग इन दिनों अपनी गेरों की रिहर्सल चांदपोल किला रोड स्थित गूंदेश्वर महादेव मंदिर में कर रही है। इस गेर के मुख्य गायक ललित मत्तड़ व अनिल ‘गेरिया और गीतकार व संगीतकार डॉ. धर्मदत्त ‘रोबिन रहेंगे। यह पूरा आयोजन एनजी गु्रप की ओर से रहेगा। कार्यक्रम को लेकर शहर के युवाओं में भी खासा
उत्साह देखा जा रहा है। गूंदेश्वर महादेव मंदिर में रिहर्सल भी इन दिनों देर रात तक चल रही है। हालांकि पिछली बार की गेर में ‘हाय-हाय ये नोटबंदी, सगिया भी पड़ गई ठंडी जैसे श्लील गायन अभी तक लोगों की जुबां पर है।

राजा मानसिंह के समय से परंपरा: माईदास

जोधपुर में गेर गायन की परंपरा राजा मानसिंह के समय से चली आ रही है। शहर के 6 दशक पुराने गेर गायक माईदास थानवी ने बताया कि इस परंपरा को बाद में जोधपुर के ब्राह्मण समाज ने भी अपनाया। धीरे-धीरे यह श्लील गाळी गायन की परंपरा शादी-ब्याह में भी शुरू हो गई। जिसमें लोग अपने सगियों को रिझाने व ओळबा देने के लिए श्लील गाळी गायन का उपयोग करने लगे। भीतरी शहर में गेर सुनने की परंपरा भी युवाओं में किसी फैशन से कम नहीं है। सोहन फाग के थानवी ने बताया कि इस बार वे होली पर गेर निकालने का मानस बना रहे है, बाकी वे अपनी टीम से राय लेंगे।