
पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा शिकारी पक्षी तापमान में गिरावट के साथ जोधपुर पहुंचने शुरू हो चुके हैं।

शीतकाल में मारवाड़ की जलवायु अनुकूल होने पर प्रवासी पक्षियों की तादाद बढऩे लगी है।

पक्षी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में 59 प्रजाति के पक्षी विभिन्न जलाशयों पर डेरा डाल चुके हैं।

जोधपुर पहुंचे शिकारी पक्षियों में पश्चिम एशिया, साइबेरिया, तिब्बत, मंगोलिया और नेपाल से स्टेपी चील, अफ्रीका तथा यूरोपीय देशों से पैरिवेरियन, पराग्रीन फ ॉल्कन, इराक व कजाकिस्तान से विभिन्न प्रजातियों के बाज, हिमालय एवं मध्य पूर्व एशिया से बजर्ड की दस्तक जोधपुर में इस बार करीब एक माह विलंब से हुई है।

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार इस बार शीतकाल में उत्तर-पूर्वी पाकिस्तान एवं नेपाल में पाए जाने वाले शिकारी प्रजाति के स्नेक टोडी ईगल तथा ओसप्रे पक्षी भी जलाशयों के आसपास और केरू डंपिंग स्टेशन के पास नजर आए हैं।

हवा में शिकार करने वाले स्टेपी ईगल एवं पेराग्रीन फ ॉल्कन मुर्रा भी शहर के आसपास के क्षेत्रों में दस्तक दे चुके हैं।

मृत मवेशी खाकर वातावरण को स्वच्छ बनाने वाले गिद्धों की संख्या में इस बार पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। इनमें लंबी गर्दन वाले सफेद पीठ वाले इजिप्शियन, राजगिद्ध, हिमालयन ग्रिफॉन, यूरोपियन ग्रिफॉन, सीनेरीयस प्रजाति के पक्षी नजर आए हैं।