22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पिचियाक जेल : बंदी  निराहार रहकर कर रहे हैं माता से अरदास

बिलाड़ा (जोधपुर) पिचियाक के उप कारागार में बंदी के रूप में रह रहे पच्चीस बंदी इन दिनों मां दुर्गा की अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर नौ दिन उपवास पर हैं।

2 min read
Google source verification
Navratri in Pichiyak prison

पिचियाक जेल : बंदी  निराहार रहकर कर रहे हैं माता से अरदास

बिलाड़ा (जोधपुर) पिचियाक के उप कारागार में बंदी के रूप में रह रहे पच्चीस बंदी इन दिनों मां दुर्गा की अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर नौ दिन उपवास पर हैं। पश्चाताप के आंसुओं का आस्था से यह मिलन जेल प्रशासन व अन्य कैदियों को भी प्रेरित कर रहा है।

कारागार प्रशासन ने देवी जगदम्बे मां की आराधना में डूबे इन पच्चीस बंदियों को अलग बैरक में रखते हुए पूजा पाठ एवं आरती के लिए सारी सामग्री उपलब्ध करवाई है।

जिले के उप कारागार पिचियाक में जहां समय की घंटियां बजा करती हैं, वहीं इन दिनों घंटे- घडिय़ालों की आवाज के साथ माता जी की आरती और ओम हीं क्लीम चामुंडाय नम: की स्वर लहरियां सुनाई दे रही हैं। इन बंदियों की आस्था के वशीभूत अन्य बैरकों के बंदी भी सुबह -शाम की आरती में शामिल होने लगे हैं। पिचियाक स्थित उप कारागार को जिले की दूसरी सबसे सुरक्षित जेल माना जाता है।

मुख्य बैरक में नवरात्रा स्थापना के साथ ही मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं के चित्र लगाए गए हैं।जाने अनजाने में हो चुके अपराध के पश्चाताप के बाद अब मां की आस्था में डूबे बंदी यहां अखंड ज्योत के सामने सुबह- शाम महाआरती करते हैं। इस संवाददाता को बंदियों ने बताया कि हो सकता है मां भवानी ,जोगमाया ,जगदम्बा की आराधना से उनकी जिंदगी बदल जाए। अपराध कार्य करने की जो भूल उनसे हुई, उसे माफ कर दे और वे उस से मुक्त हो जाएं। बंदियों की आंखों में पश्चाताप के आंसू साफ झलक रहे थे।

दिनचर्या ही बदल गई

व्रत उपवास रखने वाले बंदियों को रोटी की जगह दूध व फलाहार दिया जाता है, इसके अलावा शुद्ध पानी की भी व्यवस्था की गई है। जेल प्रशासन नवरात्रा पर विशेष अनुष्ठान कराने के लिए समाजसेवियों से भी सहयोग ले रहा है ।प्रसाद एवं मालाएं भी प्रतिदिन जेल पहुंच जाते हैं ।

यह बंदी सुबह 5 बजे उठकर नित्यकर्म कर स्नान आदि के बाद 9 बजे सामूहिक पाठ -भजन करते हैं। 11 बजे इन्हें बैरक में बंद कर देते हैं। अपरान्ह 3 बजे वापस बैरक से बाहर निकालते हैं ।रोजमर्रा के काम के बाद शाम 6.30 बजे बैंरकों में बंद कर देते हैं। शाम की पूजा के बाद बंदी बैरक में भजन गाने लगते हैं और भक्ति के साथ सो जाते हैं ।कई बंदी ऐसे भी हैं जो देर रात तक माता कीं माला जपते हैं ।

इन बंदियों में से एक हत्या के अपराध में बंद पाली जिले का किरण जो कम उम्र का ही है ,कहता है यह कैसी विडंबना है कि उसे अपने मां -बाप की सेवा करनी थी और जमीन की लड़ाई की वजह से वह यहां पहुंच गया। हरियाढाना का रामदीन भी इन दिनों पश्चाताप के आंसू बहा रहा है ।उचियाडा का भोलाराम जेल में अगरबत्ती जलाना ,आरती करना ,ज्योत जलाना आदि कार्य में व्यस्त रहता है। कारागार स्टाफ के धर्मपाल ,महावीरसिंह ,राम अवतार एवं राम सिंह इन माता के भक्तों का इन दिनों पूरा ख्याल रखते हैं।

इन्होंने कहा

जेल में हर बंदी को अपने धर्म के अनुरूप पूजा करने का अधिकार है ,इस जेल में भी नवरात्रा में बंदी माताजी का उपवास एवं व्रत रख रहे हैं ।

-कानाराम,जेलर उप कारागार, पिचियाक