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लापरवाही : घायल तड़पता रहा, सायरन बजाती रही एम्बुलेंस, नहीं खुले स्वास्थ्य केन्द्र के ताले…देखें वीडियो

रतकुड़िया का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र :सीएचसी में 15 से अधिक का स्टाफ

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जोधपुर/ पीपाड़सिटी . उपखंड क्षेत्र के रतकुड़िया गांव के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार देर रात्रि को सड़क हादसे में घायल ग्रामीण को त्वरित उपचार के लिए पहुंची एम्बुलेंस पन्द्रह मिनट तक सायरन बजाती रही,लेकिन न तो मुख्य द्वार के ताले खुल सके और न ही कोई चिकित्सा कर्मी बाहर पहुंच सका। ऐसे में एम्बुलेंस में बैठा मरीज तड़फता रहा जिसे भोपालगढ़ के उपजिला अस्पताल ले जाना पड़ा।

रतकुड़िया गांव की पहचान राजस्थान ही नहीं पूरे भारत में देखी जाती हैं। राजस्थान में पूर्व मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके रामनारायण डूडी, पूर्व मंत्री कमसा मेघवाल का गांव रतकुड़िया ही है। लेकिन चिकित्सा सुविधा के रूप में देखे तो राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने पर भी मरीज बेहाल बने हुए हैं। ना तो कभी समय पर डॉक्टर मिलते हैं ना ही चिकित्सा विभाग के कर्मचारी मिलते हैं। जिसके कारण मरीजों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

सायरन बजाती रही एम्बुलेंस।

मंगलवार रात्रि को रतकुड़िया कस्बे के पास ही मोटरसाइकिल सवार 70 वर्षीय लुंबाराम जाट रतकुड़िया-साथीन के बीच दुर्घटना में घायल होने पर एंबुलेंस से मरीज को रतकुड़िया लेकर पहुंचे। वहाँ पर एंबुलेंस के कर्मचारियों ने 15 मिनट से अधिक समय तक सायरन भी बजाए, लेकिन ना कोई डॉक्टर ना कोई कर्मचारी वहां बाहर आया। घायल की हालत खराब होती देख एंबुलेंस को भोपालगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां से मरीज को जोधपुर रेफर किया गया। गौरतलब है कि रतकुड़िया गांव की सीएचसी की जगह मरीजों को भोपालगढ़, पीपाडसिटी या जोधपुर जाकर अपना इलाज करवाना पड़ रहा। ऐसे में लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पन्द्रह से अधिक का स्टाफ फिर भी भी हालात खराब

ग्रामीणों के विशेष आग्रह पर मुख्यमंत्री गहलोत ने गत वर्ष भावी-पीपाड़सिटी-भोपालगढ़-खींवसर स्टेट हाइवे को देखते हुए रतकुड़िया की पीएचसी को सीएचसी में क्रमोन्नत किया। यहां पर लगभग 15 से अधिक स्टाफ लगा हुआ है।फिर भी समय पर मरीजों का कभी इलाज नहीं हो रहा है, जिसके चलते ग्रामीण भी परेशान हैं। खुद सरपंच वीरेन्द्र डूडी ने भी कई बार देर रात्रि को अस्पताल का निरीक्षण किया,वहाँ पर चिकित्सा सेवाएं संतोषजनक नही मिली। इसको लेकर उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया लेकिन कोई कार्रवाई नही हो सकी। अस्पताल में ज्यादातर कर्मचारी स्थानीय होने के साथ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं। इस कारण ड्यूटी पर कम और अपने सामाजिक सरोकारों को पूरा करने के लिए गायब रहने की आदत के चलते आमजन को सुविधाएं प्राथमिक स्तर की भी नही मिल पा रही हैं।

इनका कहना हैं।

घायल मरीज को लेकर सीएचसी रतकुड़िया गए। गेट बंद था। करीब 15 मिनट से भी अधिक समय तक सायरन बजाते रहे लेकिन कोई नहीं कर्मचारी मौजूद ही नहीं था। उसके बाद घायल को भोपालगढ़ लेकर पहुंचे।

दौलतराम जाट, एंबुलेंस कर्मचारी।

हमारे दो कर्मचारी वही थे, कर्मचारियों को जब जानकारी मिली तो वह बाहर आए तब तक एंबुलेंस निकल चुकी थी।

डॉ कृष्ण कुमार,प्रभारी,सीएचसी रतकुड़िया।

रतकुड़िया सीएचसी प्रभारी से रिपोर्ट तलब कर सीएमएचओ जोधपुर को प्रेषित की गई हैं।

डॉ सुरेन्द्रसिंह परिहार, बीसीएमएचओ, पीपाड़सिटी।