बिजली कनेक्शन शुल्क जैसी पांच सेवाओं पर जीएसटी नहीं

-हाईकोर्ट ने केंद्रीय परिपत्र के प्रावधान को खारिज किया, उपभोक्ताओं व बिजली कंपनियों को राहत

By: rajesh dixit

Published: 26 Feb 2021, 06:28 PM IST

जोधपुर। विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन जारी करने या मीटर शिफ्ट करने जैसी पांच सेवाओं के लिए दिए जाने वाले शुल्क पर अब जीएसटी नहीं देना होगा और न ही विद्युत वितरण कंपनियों को अन्य सेवाओं के नाम पर कर योग्य करार दी गई सेवाओं के लिए टैक्स वसूली के झंझट में उलझना पड़ेगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने उपभोक्ताओं व बिजली कंपनियों को राहत देते हुए केंद्र सरकार के एक स्पष्टीकरण परिपत्र के उस भाग को खारिज कर दिया है, जिसमें पांच सेवाओं को कर के दायरे में लाया गया था।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति तथा न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डिस्कॉम) की याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्रीय कर विभाग को ऐसी किसी भी टैक्स की मांग या वसूली के लिए ठोस कदम उठाने से रोक दिया है। याची उपक्रम की ओर से अधिवक्ता अंजय कोठारी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने वैधानिक अधिसूचना के माध्यम से विद्युत आपूर्ति तथा वितरण को नकारात्मक सूची (छूट प्राप्त) में रखा है, लेकिन इसके बावजूद जीएसटी कौंसिल की सिफारिश पर केंद्र के राजस्व विभाग ने 1 मार्च, 2018 को एक परिपत्र जारी किया। इस परिपत्र के प्रावधान 4 (1) में स्पष्टीकरण देते हुए कहा गया है कि हालांकि विद्युत आपूर्ति व वितरण छूट प्राप्त श्रेणी में है, लेकिन डिस्कॉम द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाएं जैसे बिजली का कनेक्शन जारी करने के लिए आवेदन शुल्क, मीटरिंग उपकरण के पेटे किराया शुल्क, मीटर, कैपेसिटर तथा ट्रांसफार्मर का परीक्षण शुल्क, मीटरों की शिफ्टिंग के लिए ग्राहकों से वसूला जाने वाला श्रम शुल्क तथा डुप्लीकेट बिल के लिए वसूला जाने वाला शुल्क कर योग्य है। कोठारी ने इसे अधिसूचना के विपरीत बताते हुए कहा कि यह तमाम सेवाएं विद्युत आपूर्ति व वितरण तंत्र का हिस्सा है, इसे अलग से कर योग्य मानना अधिनियम के प्रावधानों के असंगत है। जीएसटी कौंसिल या राजस्व विभाग अधिसूचना से परे जाकर ऐसा कोई परिपत्र न तो जारी कर सकते हैं और न ही इस प्रकृति के परिपत्र से ऐसा कोई करारोपण किया जा सकता है।
खंडपीठ ने माना कि बिजली आपूर्ति के संपूर्ण प्रक्रम में कुछ सेवाओं को बाहर करके उन्हें कर योग्य मानने का प्रयास न केवल मनमाना है, बल्कि अनुचित भी है। इस तरह की कार्यवाही सीजीएसटी अधिनियम की धारा 8 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है। कोर्ट ने परिपत्र के प्रावधान 4 (1) को ही खारिज कर दिया।

rajesh dixit Desk
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