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सात वार्डो की आबादी से जुड़े सेटेलाइट अस्पताल में प्राथमिक जांच सुविधा तक नहीं

जर्जर हो रहे भवन में चिकित्सक स्टाफ भी आधा अधूरा

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सात वार्डो की आबादी से जुड़े सेटेलाइट अस्पताल में प्राथमिक जांच सुविधा तक नहीं

सात वार्डो की आबादी से जुड़े सेटेलाइट अस्पताल में प्राथमिक जांच सुविधा तक नहीं

जोधपुर. करीब सात निगम वार्डो की बड़ी आबादी से जुड़ा प्रतापनगर क्षेत्र का एकमात्र स्वामी प्रभुतानंद राजकीय सेटेलाइट अस्पताल लंबे अर्से से दुर्दशा का शिकार बना हुआ है। सेटेलाइट अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 700-800 की ओपीडी के बावजूद मरीजों को टांके लगाने की सुविधा तो दूर प्राथमिक उपचार तक की सुविधाओं तक का अभाव है। क्षेत्रवासी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य सहित जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और अस्पताल प्रशासन से संबंधित सभी अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके है लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी है।

आदेश 24 घंटे का लेकिन सुविधा एक पारी की
पहले सेटेलाइट अस्पताल सीएमएचओं के अधीन था लेकिन वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के अधीन है। कोरोना लॉकडाउन से पूर्व प्रतिदिन 800 मरीज उपचार के लिए आते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर आधी से भी कम रह गई है। राज्य सरकार के आदेश से पहले चिकित्सालय 24 घण्टे खुला रहता था लेकिन अब एक ही पारी में कुछ ही घंटों के लिए खुला रहने से आम गरीब लोगो को मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।

क्षेत्रवासियों का कहना है

आवश्यक मशीन एवं उपकरणों का अभाव में मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। आंखो के डॉक्टर के पास किसी प्रकार के उपकरण नहीं है। एक्सरे, सोनोग्राफी की मशीन नहीं है। लैब है लेकिन ब्लड संबधित कोई जांच नही होती । एम्स के कुछ रेजीडेन्ट डॉ भी बैठते है लेकिन सुविधाओं की अभाव में कोई फायदा नहीं मिल रहा है।
एडवोकेट मुरली छंगाणी, क्षेत्रवासी

चिकित्सालय भवन भी जर्जर

सहायक अभियंता की ओर से अवलोकन कर मरम्मत के लिए करीब 28 लाख की राशि का तकमीना बनाकर राज्य सरकार को प्रेषित किए अर्सा बीत चुका है। अस्पताल प्रभारी के अनुसार प्रयोगशाला में चिकित्सा उपकरण का पूरी तरह अभाव है। वर्तमान में 9 चिकित्सक और इतना ही नर्सिंग स्टाफ है । लेकिन रोगी भार को देखते हुए अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता है ।
लोकेश सोनगरा, क्षेत्रवासी

ऑपरेशन थिएटर फिर भी कोई डिलेवरी केस नहीं

हार्ट - पेशेन्ट के लिए प्राथमिक उपचार व ऑक्सीजन सिलेण्डर तक नहीं है। ऑपरेशन थियेटर में सारी व्यवस्था होने के बाद भी कोई भी डिलेवरी केस आज तक नहीं आया है। अस्पताल नाम मात्र का सेटेलाईट अस्पताल है जिसका भवन भी जर्जर अवस्था में है ।
भरत आसेरी, क्षेत्रवासी

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