- शहरी क्षेत्र में सरकार की ओर से बेरोजगारी कम करने के कोई उपाय नहीं -- कोरोना के कारण बढ़ी बेरोजगारी दर
जोधपुर।
वैश्विक कोरोना महामारी ने गांव व शहरों में बेरोजगारी की समस्या खड़ी करने के साथ हजारों लोगों से उनकी रोजी-रोटी छीन ली है। ऐसे में सरकार ने गांवों में तो मजदूरों का पलायन रोकने के लिए नरेगा योजना के तहत हो रहे कार्यो में उन्हें जोड़कर रोजगार से जोड़ा। वहीं शहरी क्षेत्र में कोरोना की वजह से ही बेरोजगारी का सामना कर रहे लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी।सेंटर फोर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मई तक के सर्वे के अनुसार प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान राजस्थान में 5.9 प्रतिशत बेरोजगारी की दर थी, जो तमिलनाडु, बिहार, झारखंड आदि राज्यों से बेहतर थी।
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एमजीनरेगा में डेढ़ गुना पंजीयन
कोरोना के दौरान जो लोग गांवों से पलायन करके आए, उनके लिए नरेगा योजना वरदान साबित हुई। केन्द्र सरकार की महात्मा गांधी (एमजी) नरेगा योजना में पिछले साल की तुलना में इस बार डेढ़ गुना लोगों का पंजीयन हुआ व रोजगार मिला है। वहीं इस दौरान शहर में आए लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पूरी तरह से हल नहीं हुआ है ।
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जोधपुर में शुरुआती दौर में रही विकट स्थिति
कोविड़ के कारण लॉकडाउन में शहर में संचालित हो रहे प्रमुख उद्योगों में मजदूरों की बड़ी संख्या में छंटनी की गई। इनमें हैण्डीक्राफ्ट, स्टील, टेक्सटाइल, ग्वारगम, एग्रो फूड, इंजीनियरिंग, स्टील बर्तन इकाइयां, खनन आदि प्रमुख उद्योग शामिल है। उद्योग संचालन की स्थिति नहीं होने के कारण इकाइयों में मजदूरों की संख्या सीमित करने के लिए इन सभी उद्योगों में से हजारों की संख्या में मजदूरों को निकाला गया। इनसे कई मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई थी।
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धीरे-धीरे हो रहा सुधार
अनलॉक व उद्योग-धंधे वापस चालू होने के बाद अब हालात में काफी हद तक सुधार हुआ है। यहां के प्रमुख औद्योगिक संगठनों ने भी फैक्ट्रियों से निकाले गए मजदूरों को वापस लेने की प्रक्रिया व नए मजदूरों को उनके कौशल ज्ञान के अनुसार रोजगार देने के लिए पंजीयन कर उन्हें रोजगार से जोडऩे का काम किया है।