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पूर्णिमा बोहरा/जोधपुर. यह साल का पहला दिन था और आम लोगों की तरह सरकारी अफसर और कर्मचारी भी न्यू ईयर मूड में थे। अपने काम के मामले में बिल्कुल बेफिक्र और लेटलतीफ। किसी का काम देरी से हो तो अपनी बला से। दरअसल सरकारी कार्यालय में अफसर शाही टाइम मैनेजमेंट के प्रति कितनी प्रतिबद्ध है इसका राजस्थान पत्रिका टीम ने साल के पहले दिन जायजा लिया। टीम ने अलग-अलग कार्यालयों में पहुंच कर सुबह के समय कार्यालय की स्थिति टटोली। साल के पहले दिन ही अफसरशाही लेटलतीफ दिखाई दी।
अफसर तो अफसर, कर्मचारी भी अपनी मनमानी के समय कार्यालय में प्रवेश करते हुए दिखे। अमूमन शहर के अधिकतर सरकारी कार्यालयों का यही हाल नजर आया। कहीं कर्मचारी कार्यालय में पहुंचे तो भी काम के मूड में नहीं दिखे तो कोई किसी के कक्ष में नव वर्ष की शुभकामनाएं देने पहुंचा और वहीं घंटों बिता दिए । तो कुछ कार्यालय परिसर में ग्रुप में खड़े धूप सेंकते हुए नजर आए। आम जनता कार्यालय में पहुंच कर अपने कार्य करवाने का इंतजार करती हुई दिखाई दी। अस्पताल में मरीज डॉक्टर का इंतजार करते हुए नजर आए।
सीन -१
सुबह ९.३० बजे : कलक्ट्रेट
पत्रिका टीम सुबह ९.३० बजे कार्यालय पहुंची। पूरा कलक्ट्रट सूना नजर आया। यहा सुबह १०.०५ बजे अतिरिक्त जिला कलक्टर व अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट छगनलाल गोयल अपनी कुर्सी पर नजर आए । वहीं १०.१५ बजे एडीएम तृतीय मानाराम अपने कक्ष में पहुंचंे। जबकि १० मिनट अपने कक्ष में रुकने के बाद वे वहां से अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के पास नव वर्ष की शुभकामनाएं देने के लिए पहुंचे। इसी तरह सुबह १०.३० बजे तक जिला कलक्टर की कुर्सी खाली ही नजर आई।
सीन -२
सुबह १० बजे : जेडीए
जेडीए में १० बजे तक कार्यालय में कोई भी नहीं था। दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यालय में आयुक्त के कक्ष के बाहर बैठे हुए दिखे। उनसे बात करने पर बताया कि कार्यालय का ९.३० का समय है । इस पर वहां रखा कार्यालय उपस्थिति रजिस्टर देखा, जो खाली ही नजर आया। कार्यालय के सभी कक्ष खाली ही थे। जबकि सुबह ९.४५ बजे सचिव अरुण कुमार पुरोहित के कक्ष का जायजा लिया तो कक्ष बंद ही नजर आया। जबकि ९.५० बजे आयुक्त दुर्गेशकुमार बिस्सा का कक्ष बंद ही दिखा। इसी तरह १० बजे एक-दो कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश करते हुए नजर आए। सुबह १०.१० बजे आयुक्त की गाड़ी कार्यालय के मुख्य द्वार पर रुकी। गाड़ी से उतर कर आयुक्त सीधे अपने कक्ष में पहुंचे।
सीन -३
सुबह १०.३० बजे : डिस्कॉम
पत्रिका टीम सुबह १०.३० बजे डिस्कॉम कार्यालय पहुंचीं, जहां सुबह १०.४५ पर डिस्कॉम एससी जेके सोनी अपने कक्ष में मौजूद नजर आए, लेकिन सुबह ११ बजे तक डिस्कॉम कार्यालय सूना ही नजर आया। कार्यालय की सीढि़यां चढ़ कर ऊपर एकाउन्टेंट सेक्शन का जायजा लिया तो वहां कक्ष बिल्कुल सूना नजर आया। वहां एक एकाउन्टेंट भी नजर नहीं आया। नीचे उतर कर कार्यालय परिसर के पीछे की ओर देखा तो एक दो कर्मचारी धूप सेंकते हुए दिखाई दिए।
सीन -४
सुबह ११.१५ बजे : नगर निगम मुख्यालय
सुबह ११.१५ बजे पत्रिका टीम नगर निगम मुख्यालय पहुंची, जहां नगर निगम परिसर सूना नजर आया। एक दो कर्मचारी एकल खिड़की पर दिखे। इस खिड़की पर आम जनता की लम्बी कतारें नजर आईं। ऑफिस सुपरिंटेंडेंट कक्ष भी खाली था, रैवेन्यू कक्ष में एक दो कर्मचारी नजर आए। वे आपस में नव वर्ष की बधाइयां दे रहे थे। सुबह ११.३० बजे तक प्रथम तल के सभी कक्ष खाली ही दिखे। ऊपर उपायुक्त कार्यालय में उपायुक्त नदारद थे। इन कक्षों में बाबू मौजूद थे, लेकिन वे फोन पर बधाई देने व चाय पीने में व्यस्त दिखे।
सीन -५
सुबह ९.३५ बजे : पावटा अस्पताल
सुबह ९.३५ बजे तक डॉक्टर अशोकसिंह राठौड़ के कक्ष में मरीज उनके आने का इंतजार करते हुए नजर आए। कक्ष के बाहर भी मरीजों की लम्बी कतारें दिखीं। अन्य कक्षो में भी नर्सिंग स्टाफ मौके पर मौजूद नहीं था। एेसे में मरीज इधर से उधर कक्ष में घूमते हुए नजर आए।
Published on:
02 Jan 2018 04:05 pm
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