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भाव बढ़ने की उम्मीद से रोके प्याज ने निकाले किसानों के आंसू ,पढ़े पूरी खबर

पहले कम भाव व खरीददार नहीं मिलने से किसान बेच नही पाए बाद में बचा-कुचा प्याज औने-पौने दाम में बेचना पड़ा, इस बार तो किसानों को प्याज की लागत भी नहीं मिली

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भाव बढ़ने की उम्मीद से रोके प्याज ने निकाले किसानों के आंसू ,पढ़े पूरी खबर

भाव बढ़ने की उम्मीद से रोके प्याज ने निकाले किसानों के आंसू ,पढ़े पूरी खबर

जोधपुर / ओसियां. भाव बढ़ने की उम्मीद से रोके प्याज ने किसानों के आंसू निकाल दिए है। पहले मौसम की मार से किसान परेशान हुए और बाद में प्याज़ के गिरे भावों ने चिंता बढाई और जो उम्मीद प्याज से थी, वह भी मटियामेट हो गई। पूर्व में बेमौसम हुई बारिश से 50-80 प्रतिशत फसलें ख़राब हो गई थी।

बिगड़े मौसम से जीरा, ईसबगोल सहित अन्य अधिकांश फसलें नष्ट हो गई। इसके बाद किसानों को प्याज़ की फसल से काफी उम्मीदें थी वह भी पूरी तरह से धराशायी हो गई। पहले किसानों ने कम भाव व खरीददार नहीं मिलने के चलते प्याज़ की फसल बेची नहीं और बाद में हुई बेमौसम बारिश से प्याज की फसल खेत में ही आधे से ज्यादा सड़ गई। मजबूरी में बची कुची प्याज की फसल औने पौन दाम में बेचनी पड़ी। किसानों की माने तो इस बार प्याज की फसल घाटे का सौदा साबित हुई। किसानों पर संकट के बादल लगातार छाए हुए हैं। बीता साल किसानों के लिए बहुत खराब गुजरा। किसानों की पुकार न तो राज सुन रहा हैं और न ही राम।

प्याज उगाने की लागत भी नहीं मिली

कई दिनों तक प्याज़ की फ़सल कटी हुई खेतों में पड़ी रही। सड़ने के डर से किसान बार-बार प्याज़ की ढेरियों को उलटा पलटा कर रहे थे। इसके बाद बेमौसम बारिश व बिपरजॉय तुफान ने सबकुछ तहस नहस कर दिया इसके बाद जैसे तैसे प्याज को सुखाया व घाटे में बेचना पड़ा, जिससे प्याज उगाने की लागत भी नहीं मिली।

3 से 5 रूपए प्रतिकिलों बिका प्याज

एक बीघा में प्याज की उपज के लिए 25 से 30 हजार रुपए लागत आती है। वहीं शुरूआत में ही प्याज़ की क़ीमत ही 8-10 रुपए प्रति किलो रही। हालांकि बाजार में यही प्याज़ 15-20 रुपए प्रति किलों बिकते थे। आज भी बाजार में इसी भाव से प्याज बिकते हैं, लेकिन किसानों को 3 से 5 रुपए प्रति किलों ही मिले।

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