
open air theater
जोधपुर के अशोक उद्यान का ओपन एयर थिएटर एक विरासत की हैसियत रखता है। अपनी खूबसूरत बनावट के कारण यह पेरिस, वेल्स और जिनेवा की याद दिलाता है। राजस्थान आवासन मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष मानसिंह देवड़ा ने अशोक उद्यान में ओपन एयर थिएटर का खूबसूरत सपना देखा था,जो उनकी जिंदगी में साकार न हो सका।
आर्किटेक्ट ने इसे हकीकत में बदलने का ताना बाना बुना था, जिसमें दर्शक दीर्घा, प्लाजा वर्क,स्टोन वर्क, पीसीसी,अर्थ फिलिंग,सोलिंग,फ्लोरिंग, पेन्टिंग,स्कर्टिंग, सीलिंग प्लास्टर, ब्रिक पार्टिशन,रैम्प, शटरिंग, जेट फव्वारे व लाइट साउंड रूम का काम शामिल था।
शहर के कलाकारों और जागरूक नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान चला कर इसकी शक्लो सूरत बदलने के लिए आवाज उठाई। शहर के बाशिंदे दूसरी बार श्रमदान करने के लिए जुटे। इसमें सभी का साथ नजर आया।
ओपन एयर थियेटर: फैक्ट्स
क्षेत्रफल: 10,967 वर्ग मीटर
शिलान्यास: 6 जुलाई 2001
आर्किटेक्ट: अनु मृदुल
विभाग: राजस्थान हाउसिंग बोडज़्
ग्राउंड फ्लोर पर कमरे: 12
शुरू होना था: 27 जुलाई 2003 तक
अब तक हुआ कार्य: 9058 वर्ग मीटर
थियेटर पर अब तक खर्च: 181.20 लाख
हाउसिंग बोर्ड को चाहिए: 5 करोड़ से ज्यादा बजट
अधूरा रहने का कारण: अपर्याप्त बजट
पत्रिका ने संवारी विरासत
राजस्थान पत्रिका जोधपुर टीम ने उपेक्षित पड़ी धरोहर को संवारने का बीड़ा 3 अप्रेल को उठाया। थियेटर मांगे जिंदगी नाम से स्वच्छता अभियान शुरू किया गया। इसमें पत्रिका को शहर के रंगकर्मियों, कलाप्रेमियों, जिला प्रशासन, नगर निगम, निजी संगठनों के साथ ही शहर के अन्य लोगों का भी भरपूर साथ मिला।
सहभागिता के अनूठे जज्बे के साथ चहुंओर श्रमबूंदें छलक उठी। चेहरे पर थकान दिख रही थी, लेकिन सफाई करके ही हटने का जोश और जुनून उन्हें वहां से हटने नहीं दे रहा था। राजस्थान पत्रिका की प्रेरणा से राजस्थान आवासन मंडल व नगर निगम की साझा मेजबानी में जन सहयोग से सम्राट अशोक उद्यान ओपन थिएटर का नया रूप सामने आया। इस दौरान ओपन थिएटर परिसर में आगे, पीछे व मंच के अलावा दशज़्क दीर्घा सभी जगह सफाई करने वालों के रेले दिखाई दे रहे थे। इसके बाद हरयाळो राजस्थान के तहत यहां सौ पौधे भी लगाए गए।
सम्राट अशोक उद्यान में अधूरे पड़े ओपन एयर थिएटर प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला कलक्टर व आवासन मण्डल के अधिकारियों को 22 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से तलब भी किया। आवासन मंडल के पास अपर्याप्त बजट होने की वजह से इस उद्यान को जेडीए को सौंपा जा सकता है।
Published on:
02 Aug 2016 02:52 pm
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