
Open Air Theater's work starts in Jodhpur's Ashok Garden
विश्व रंगमंच दिवस पर 27 मार्च 2018 को शुरू किया गया राजस्थान पत्रिका का थिएटर मांगे जिंदगी अभियान अब रंग लाने लगा है। जेडीए ने अशोक उद्यान का काम शुरू कर दिया है। वहीं आेपन थिएटर के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं।
राशि स्वीकृत की गई
जेडीए अध्यक्ष महेन्द्रसिंह राठौड़ के निर्देशानुसार अशोक उद्यान परिसर में लॉन, हेज व पेड़ों के रखरखाव के लिए नवीन सिंचाई व्यवस्था स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। कार्य के लिए ४५ लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसी तरह अशोक उद्यान के विकास के क्रम में अधूरे पड़े आेपन एयर थियेटर का कार्य पूरा करने के लिए निविदा प्राप्त की जा चुकी है। हर कार्य के लिए मौके पर बोर्ड लगेगा, जिसमें पूरा ब्यौरा होगा।
पत्रिका ने तीन साल तक जगाए रखा
राजस्थान पत्रिका की ओर से विश्व रंगमंच दिवस पर २७ मार्च २०१५ को शुरू किया गया थिएटर मांगे जिन्दगी समाचार अभियान अब रंग लाने लगा है। पहले तो इसका शुरुआती समाचार छपते ही राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान ले लिया था। उसके बाद राजस्थान पत्रिका की प्रेरणा से शहर के रंगकर्मियों, साहित्यकारों व आम जनता ने यहां पर दो बार सफाई की। इस दौरान अभियान की कडि़यां प्रकाशित होती रहीं और हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार और प्रशासन के प्रतिनिधि अदालत में पेश होते रहे। कालांतर में यह उद्यान राजस्थान आवासन मंडल से लेकर जेडीए को दे दिया गया। अब जेडीए ने इस उद्यान की कायापलट करने का बीड़ा उठाया है।
समस्त ब्रह्माण्ड रंगमंच है और हम सभी अभिनेता
खुशी की इस वेला पर राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और अकादमी के कला पुरोधा पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ रंगकर्मी रमेश बोराणा ने कहा कि समस्त ब्रह्माण्ड रंगमंच है और हम सभी अभिनेता है । धर्म दर्शन की ये ईश्वर निष्ठ उक्ति जितनी सहज सरल और समर्पित भावना से ओत प्रोत हो कर वैश्विक एकरूपता व सम नियति का सुखद दृश्य बिम्ब उपस्थित करती है। ये मान . सुन कर अच्छा सा लगता है कि पूरा विश्व ही रंगमंच है और हमसभी सर्वे भवंतु सुखिन : को चरितार्थ करने वाले अभिनेता है . लेकिन पलट कर देखें तो यथार्थ के पटल पर आज चारों ओर दुनिया में जो कुछ हो रहा है वो भरत मुनि की रंग वर्जनाओं की तरह अकला की तरह घटित हो रहा है।
रंगधर्मी की संवेदना और अभिव्यक्ति रेखाओं व सीमाओं से परे
उन्होंने कहा कि मानवता के माथे पर हिंसा, भय, भूख और विनाश की जो दृश्य रचना आलोकित की जा रही है उस पटकथा से रंगमंच के कौनसे मूल्यों व उद्देश्यों को सार्थकता हासिल होगी, कहा नहीं जा सकता। क्योंकि रंगधर्मी की संवेदना और अभिव्यक्ति राष्ट्रीय रेखाओं व सीमाओं से परे होती है। भरत मुनि ने अपने नाट्य शास्त्र में कहा है अवस्था अनुकृर्ति नाट्यम अर्थात समाज में घटित स्थितियों का चित्रण करना ही नाटक का उद्देश्य है।
रंगमंच निर्मित कर सकें
रमेश बोराणा ने कहा कि हम नाटक प्रस्तुत करने वाले आज के दिन आप सभी से जो जीवन में नाटक पैदा करने वाले महामना हैं, से सविनय आग्रह अनुरोध करते हैं कि हमें समाज में ऐसी स्वस्थ भाव भूमि और स्थितियां प्रदान करें जिससे हम भविष्य का सुखद अनुगूंज वाला आनंदित रंगमंच निर्मित कर सकें, जिसमें मानवता का कल्याण और विश्व शांति की सृजना अंतर्निहित हो। आओ प्रफु ल्लित होना सीखें। नाद अनहद सुनना सीखें। जीवन में रंग भरना सीखें। अर्थ अपने को देना सीखें।
- एम आई जाहिर
Published on:
18 Apr 2018 08:00 am
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