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9 महीनों के ऑक्सीजन सिलेंडर 45 दिन में ही खप गए

-सालाना खपत का 25 से 75 प्रतिशत स्टॉक काम में लेना पड़ा दूसरी लहर में

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अभिषेक बिस्सा/ जोधपुर. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ऑक्सीजन खपत के मामले में भी अस्पतालों पर बहुत भारी पड़ी। हालत यह हो गई कि ९ महीने तक चलने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर दूसरी लहर के ४५ दिनों में ही काम आ गए। अस्पतालों की सालाना खपत के २५ से ७५ प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल तो दूसरी लहर में ही करना पड़ गया। ये आंकड़े तो सरकारी अस्पतालों के हैं, निजी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन खपत का ग्राफ एकाएक बढ़ गया। गनीमत रही कि देश-प्रदेश के अन्य इलाकों से ऑक्सीजन की अतिरिक्त सप्लाई का प्रबंधन बेहतर ढंग से हो गया, वरना यहां भी ऑक्सीजन के अभाव में मौतों को नहीं टाला जा सकता था।

संभाग मुख्यालय पर स्थित दोनों सबसे बड़े अस्पतालों एमजीएच व एमडीएम में कोरोना दूसरी लहर के ४५ दिनों में कुल १ लाख ०८ हजार सिलेंडर की खपत हुई, जबकि एम्स में भी २२५ मीट्रिक टन अतिरिक्त ऑक्सीजन काम में आई।

महात्मा गांधी अस्पताल में प्रतिदिन २०० की बजाय १२०० सिलेंडर की जरूरत पड़ गई, जबकि एमडीएम अस्पताल में भी पांच-छह सौ प्रतिदिन के औसत के मुकाबले १२०० सिलेंडर रोजाना मंगाने पड़े। कई बार तो एक दिन में १८०० सिलेंडर भी जरूरत पड़ गई। इसी प्रकार एम्स जोधपुर में प्रतिदिन ५ मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले दोगुनी यानी १० मीट्रिक टन की जरूरत पड़ी।

पौने दो माह रहा कोहराम
जोधपुर में कोरोना संक्र मितों की संख्या अप्रेल के प्रथम सप्ताह में बढऩी शुरू हुई थी। मई के अंतिम सप्ताह तक कोरोना ने कोहराम मचाया। एक दिन तो तीन हजार संक्रमित आ गए। अस्पताल छोटे पड़ गए। कई मरीजों को बैड तक नहीं मिले।

ऐसे पड़ी जरूरत
पहली लहर में हाई फ्लो ऑक्सीजन वाले १० से २० प्रतिशत मरीजों को १५ लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन चाहिए थी। इस बार ६० फीसदी मरीजों को १५ से २० लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी।

ऐसे किया वार
पहली लहर ने फेफड़े के नीचले हिस्से पर वार किया था। इस बार संक्रमण ने पूरे फेफड़े को डेमेज कर दिया। पहले सीटी स्कोर १५ से २० आता, इस बार तो कई संक्रमितों का स्कोर २५ में से २५ भी आया।

फैक्ट फाइल
एमडीएम अस्पताल
-600 सिलेंडर प्रतिदिन जरूरत
-1200 सिलेंडर काम आए एक दिन में
-54 हजार सिलेंडर काम में आ गए दूसरी लहर में
-216000 सिलेंडर चाहिए एक साल में
-25 फीसदी ज्यादा सिलेंडर लगे सालाना औसत से

महात्मा गांधी अस्पताल
-200 सिलेंडर जरूरत प्रतिदिन
-1200 सिलेंडर काम आए एक दिन में
-54000 की खपत हो गई दूसरी लहर में
-72000 सिलेंडर की जरूरत एक साल में
-75 फीसदी ज्यादा सिलेंडर लगे सालाना औसत से

एम्स जोधपुर
- 5 मीट्रिक टन की जरूरत प्रतिदिन
- 10 मीट्रिक टन रोजाना की जरूरत पड़ी दूसरी लहर में
- 225 मीट्रिक टन मंगवानी पड़ी अतिरिक्त
- 1800 मीट्रिक टन की जरूरत सालाना
- 18.5 फीसदी ज्यादा आक्सीजन काम आई सालाना औसत से

बदले हुए स्ट्रेन से ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ी
इस बार कोरोना के स्ट्रेन में बदलाव था। उसी के चलते ज्यादातर लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। कोरोना की प्रथम लहर में इतना वेंटिलेटर का उपयोग नहीं हुआ। ये लहर ज्यादा घातक थी। इस बार कोरोना ज्यादा मारक और तेजी से फैला।
- डॉ. एसएस राठौड़, प्रिंसिपल, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

हमने तो सिर्फ ऑक्सीजन वाले ही केस भर्ती किए
एम्स ने तो केवल ऑक्सीजन वाले ही केस भर्ती किए। एक दिन में २-२ सौ मरीजों को ऑक्सीजन दी गई। हमारे यहां सिस्टम हैं कि जो भी इलाज हो, वह प्रोपर हो।
-डॉ. महेन्द्र कुमार गर्ग, अधीक्षक, एम्स हॉस्पिटल

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