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पेन्टर केशव वरनोती ने कहा कि यूथ टेलेंट को आगे बढ़ाना चाहते हैं

जोधपुर.ट्रिपल सी-कल्चरल कैपिटल सिटी ( Tripple c cultural capital city of Rajasthan ) जोधपुर में अपने आप में एक अनूठे और विलक्षण चित्रकार ( eminent painter ) केशव वरनोती ( Keshav varnoti ) का कहना है कि वे आज के यूथ टेलेंट ( youth talent ) को वो सब देना चाहते हैं जो उन्हें नहीं मिला।      

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जोधपुर

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MI Zahir

Jul 28, 2019

Painter keshav varanoti wants to promot youth talent

Painter keshav varanoti wants to promot youth talent

जोधपुर. ट्रिपल सी-कल्चरल कैपिटल सिटी ( Tripple c cultural capital city of Rajasthan ) जोधपुर में कल्चरल एक्टिविटीज दूसरे शहरों के मुकालबे ज्यादा और कुछ इनोवेटिव लिए हुए होती हैं। आम तौर पर कवियों का कवि सम्मेलन और शाइरों का मुशायरा होता है। संगीतकारों और गायकों का म्यूजिकल कॉन्सर्ट होता है वैसे ही फैशन डिजाइनर्स और मॉडल्स का फैशन शो होता है, लेकिन एक सवाल पैदा होता है कि क्या ब्लूसिटी में पेन्टर्स ( painters ) का भी एेसा कोई ईवंट होता है जहां सारे पेन्टर्स इकट्ठे होते हों और उनका फन देखने को मिले व गैट टुगैदर भी हो जाए। इस बारे में बात करने पर शहर में सभी का एक मत से यही कहना था कि हां जोधपुर में एक एेसा शख्स है जो यह सब बड़ी खूबी के साथ करता है और वह है विलक्षण चित्रकार ( eminent painter ) केशव वरनोती ( Keshav varnoti )।

सारे पेन्टर्स एक प्लेटफॉर्म पर

कला शिक्षण के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से सन 2014 मे नेशनल इन्सेन्टिव अवार्ड से सम्मानित वरनोती खुद न सिर्फ बहुत अच्छे पेन्टर हैं, बल्कि वे रंग मल्हार कार्यक्रम के निमित्त हर उम्र के सारे पेन्टर्स को एक प्लेटफॉर्म पर ले आते हैं। पेश है पेन्टर केशव वरनोती से बातचीत

( interview ) के संपादित अंश :

कुछ नया करना सोचता हूं
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं चाहता हूं कि अपने प्रारंभिक जीवनकाल में मैं जिन सुविधाओं से वंचित रहा, वे सभी सुविधाएं आज के कला विद्यार्थियों को मिलें। इसलिए जब भी संभव हो कला के क्षेत्र में कुछ नया आयोजन करने की सोचता हूं।

कला विरासत में मिली

वरनोती ने कहा कि मैंने ग्रामीण परिवेश, मानव मन की उद्दीप्त लालसाओं और राजस्थान की संस्कृति को संजोकर उन्हें तूलिका से कभी ऑइल पेन्ट, कभी एक्रेलिक तो कभी जल रंग तो कभी रेखांकन के रूप में जग जाहिर करने का प्रयास किया है। मुझे कला विरासत में मिली है। मेरे पिता वैद्य पूंजीलाल वरनोती कला क्षेत्र में मेरे प्रथम गुरु हैं।

जोधपुर में मन रम गया
उन्होंने बताया कि मेरी एकेडमिक कला शिक्षा दीक्षा मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उदयपुर में प्रोफेसर ओ डी उपाध्याय, सुरेश शर्मा, शैल चोयल, एल. एल. वर्मा व हेमंत द्विवेदी के सान्निध्य में पूरी हुई। उसके बाद सन 1995 से ही जोधपुर को अपनी कर्म स्थली बना लिया। तब से अब तक जोधपुर में ही मन रम गया है।