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राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति ने राजस्थान पत्रिका में सोमवार को 'क से कबूतर नहीं सीखा, अ से अलिफ भी गयाÓ समाचार से प्रभावित होकर समिति के पूर्णकालिक सचिव धीरज शर्मा ने पैरालीगल वॉलन्टियर्स के साथ कच्ची बस्ती, आंगणवां, मण्डोर स्थित आश्रय स्थल, डाली बाई मंदिर , जोधपुर आदि का निरीक्षण किया और इसकी रिपोर्ट समिति अध्यक्ष न्यायाधीश संगीतराज लोढ़ा के समक्ष पेश की। समिति अध्यक्ष के निर्देश पर शिक्षा विभाग को पत्र लिख कर कच्ची बस्ती में उचित शिक्षण व्यवस्था मुहैया कराने का आदेश दिया है। स्थानीय भामाशाह के माध्यम से बस्ती की महिलाओं के लिए सिलाई मशीन खरीद के लिए २ लाख रुपए की सहायता दी गई है।
रिपोर्ट तैयार की
पत्रिका में समाचार पढऩे के बाद सोमवार को विधिक समिति ने कच्ची बस्ती का निरीक्षण करते हुए रिपोर्ट तैयार कर अध्यक्ष महोदय के समक्ष रखी, जिसे अध्यक्ष ने गंभीरता से लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि कच्ची बस्ती में पाकिस्तान विस्थापित निवास करते हैं। ये लोग अत्यंत ही गरीब हैं तथा इनमें शिक्षा का अभाव है। इन बस्तियों में बच्चों के पढने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। एक स्कू ल है जो झोंपड़ी में चलती है, जहां शिक्षकों की भी कमी है। अन्य कक्षा के बच्चे ही छोटी कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ा लेते हैं। इसलिए ये बच्चे न तो तरीके से हिन्दी सीख पाए और ना ही अंग्रेजी सीख पाए हैं।
सहायता प्रदान की
इस दौरान समिति के प्रोत्साहन पर स्थानीय भामाशाह प्रीमियर इंफो असिस्ट्स प्रा. लि. के डायरेक्टर संदीप पटवारी की ओर से पाक विस्थापितों को समाज की मुख्य धारा में जोडऩे व उनको पैरों पर खड़े होने में सहायतार्थ दो लाख रुपए की राशि अनुदानस्वरूप प्रदान की गई। सिलाई मशीनें उपलब्ध कराने के लिए यह राशि प्रदान की गई है।
यहां रह रहे हैं विस्थापित
उल्लेखनीय है कि जोधपुर के डालीबाई का मंदिर झंवर रोड और आंगणवा में पाकिस्तान विस्थापित परिवार रह रहे हैं।
इनमें बूढ़े, बच्चे व महिलाएं शामिल हैं। इन सभी को नागरिकता का बेसब्री से इंतजार है।
Published on:
23 Jan 2018 11:13 am
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