
प्रतीकात्मक तस्वीर - पत्रिका
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने विभिन्न जिलों में दर्ज सौ से अधिक एफआइआर का सामना कर रहे चार आरोपियों को सभी लंबित आपराधिक मुकदमों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने और भाग लेने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि बार-बार शारीरिक रूप से पेशी के लिए एक जेल से दूसरी जगह ले जाना प्रशासनिक और आर्थिक बोझ बढ़ाता है।
न्यायाधीश फरजंद अली की एकल पीठ ने रणवीर सिंह सहित चार याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रियंका बोराणा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ राजस्थान के अलग-अलग जिलों में 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। कई मामलों में चार्जशीट पेश हो चुकी है और ट्रायल चल रहे हैं, जबकि कुछ प्रकरण जांच के अधीन हैं। ऐसे में हर मुकदमे में अलग-अलग अदालतों में शारीरिक रूप से पेश होना याचिकाकर्ताओं लिए अत्यंत कठिन हो रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2021 का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक कार्यवाही के हर चरण में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जा सकता है और इस माध्यम से की गई कार्यवाही भी विधिक रूप से पूर्ण न्यायिक कार्यवाही मानी जाती है। कोर्ट ने कहा कि यदि सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था उपलब्ध है, तो केवल औपचारिक पेशी के लिए बार-बार बंदियों को एक जिले या राज्य से दूसरे जिले में ले जाना तर्कसंगत नहीं है।
तकनीक का उपयोग
पीठ ने यह भी कहा कि प्रत्येक पेशी के लिए पुलिस के कई जवानों की ड्यूटी लगती है, वाहन, यात्रा भत्ता और अन्य खर्च होता है, जिससे सरकारी संसाधनों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। कई बार एक ही तरह के लेन-देन से जुड़े मामलों में आरोपियों को अलग-अलग जिलों में घुमाया जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में देरी भी होती है। ऐसे मामलों में तकनीक का उपयोग न्याय के हित में है।
Updated on:
21 Feb 2026 04:13 pm
Published on:
21 Feb 2026 04:12 pm
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