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फलोदी की मिट्टी को मिलेगी नई पहचान, खादी इंडिया से मिला प्रशिक्षण

- मिट्टी के खिलौने, सकोरा, सजावटी गमले, तवा, कडाई व मिट्टी की बोतल का बढ़ेगा क्रेज

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फलोदी की मिट्टी को मिलेगी नई पहचान, खादी इंडिया से मिला प्रशिक्षण

फलोदी की मिट्टी को मिलेगी नई पहचान, खादी इंडिया से मिला प्रशिक्षण

फलोदी. अब मिट्टी के मटकी के साथ यहां की मिट्टी के खिलौने, मिट्टी के बर्तन, सकोरा, कडाही, गमले व मूर्तियां भी फलोदी से बाहरी क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाएगी। कुम्भकार मिट्टी के बर्तन व खिलौनों का निर्माण कर यहां की मिट्टी को नई पहचान दिलाएंगे। पहले यहां निर्मित मिट्टी की मटकियों के प्रदेश के साथ देश कें अन्य क्षेत्रों में भी मांग थी, लेकिन अब मिट्टी के खिलौने, सकोरा, तवा, कडाई, मिट्टी के बर्तनों को भी जल्द ही बाजार में उतारने जा रहे हैं।

मिला तकनीक का साथ
खादी इण्डिया के उपक्रम खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ओर से आयोजित पोर्टर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम में मिली तकनीक के कारण उन्हें अब सजावटी आइटम बनाने की कला व मिट्टी को नियंत्रित करनें की तकनीक समझ में आ गई्र है।

80 कुम्भकार ले रहे प्रशिक्षण
फलोदी के कुम्हार समाज की बगेची में आयोजित प्रशिक्षण में वर्तमान में 80 कुम्भकार प्रशिक्षण ले रहे है, प्रशिक्षण लेने वाले सभी कुम्भकारों को खादी इंडिया की ओर से इलेक्ट्रिक चॉक प्रदान की जाएगी। जिसमें बीपीएल परिवार के सदस्यों को यह नि:शुल्क दी जाएगी। आयोजक प्रबन्धक शिवराज प्रजापत ने कहा कि फलोदी के कुम्भकारों में कला है, लेकिन तकनीक नहीं थी, अब तकनीक मिल गई है तो यहां की कला को देश के साथ विदेशों में भी पहचान दिलाने के प्रयास होंगे।