जोधपुर . शहर का भी दस्तूर वही जंगल वाला, खोजने वाले ही अकसर खो जाते हैं…। खालिद एेबादी का यह शेर सूर्यनगरी पर शायद सटीक बैठता है। यहां आने वाला हर शख्स इस शहर की सादगी, अपनेपन और शांत माहौल का कायल हो जाता है। एेसा ही कुछ अहमदाबाद के आर्किटेक्ट जगजीत सलूजा की क्लिक की हुई तस्वीरों में दिखता है। जॉब के लिए सनसिटी आ बसे सलूजा को शहर की गलियों का सुकून इस कदर पसंद आया है कि उन्होंने अपने इस शौक को प्रदर्शनी के जरिए बयां करने की सोची। भीतरी शहर के तूरजी के झालरे के समीप स्थित रास हवेली में सोलो फोटो एग्जीबिशन सुबह १० से शाम ७ बजे लगाई जा रही है। १२ अप्रेल तक चलने वाली इस एग्जीबिशन में ब्लूसिटी की खूबसूरती और यहां के जनजीवन को दर्शाया गया है। शहर के प्रति अपनी दीवानगी के बारे में जगजीत ने बताया कि अपने शहर अहमदाबाद में रहते हुए उन्हें शाइरी पढऩे का जुनून जागा और इन शाइरी को फोटो के माध्यम से बयां करने का विचार आया। अपनी सोच को मूर्त रूप देने के लिए उन्होंने जोधपुर की गलियों में बसे असली जनजीवन को चुना। शहर-ओ-तस्वीर विषयक इस एग्जीबिशन में सलूजा ने शहर के विविध रंगों को प्रस्तुत किया है।