
Indian Union Minister pp Chaudhary
जोधपुर. कोर्ट के आदेशों की अवमानना के मामले राजस्थान में ही नहीं अपितु देश के अधिकतर राज्यों में आए दिन सामने आ रहे हैं। हाल ही अवमानना के मामलों की अधिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि 'कोर्ट के आदेशों का अनादर जैसे हमारे खून में है।' सरकारी अफसरों के बार-बार कोर्ट के आदेश नहीं माने जाने और अवमानना के बारे में केंद्र सरकार में विधि एवं न्याय तथा इलेक्ट्रोनिक सूचना प्रोद्योगिकी केंद्रीय राज्य मंत्री से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को कोर्ट के आदेश को मानना चाहिए। इस बारे में सरकार के स्तर पर दुबारा निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं। हालांकि चौधरी ने इस मामले में दो राय भी रख अफसरों का पक्ष भी ले लिया। चौधरी ने कहा कि अवमानना के मामले में दो बातें हैं। यदि कोर्ट कोई जजमेंट देता है और ऑर्डर स्पष्ट नहीं होता है तो अधिकारी आदेशों के स्पष्टीकरण के लिए आवेदन लगाएगा।
अदालतों में अफसरों को बुलाने की बात पर भी चौधरी ने केन्द्र का रुख बताते हुए कहा कि जब अफसरों की तरफ से उनके वकील उपस्थित हो रहे हैं तो वह बात उनके वकील से भी पूछी जा सकती है। उनके कोर्ट में बुलाने से सरकारी कामकाज अटकता है। चौधरी ने सवाल किया कि क्या प्रार्थी को कोर्ट में हमेशा बुलाया जाता है। नहीं तो फिर सरकार की तरफ से भी वकील है, वकील को पूछा जाए, लेकिन कोर्ट बहुत ही आवश्यक समझता है कि अफसरों को बुलाना जरूरी है, तो ही उन्हें बुलाया जाए।
हाईकोर्ट ने कॉलेजियम की ओर से नहीं भिजवाए नाम
सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट **** अधीनस्थ अदालतों में न्यायाधीशों के पदों की कमी को लेकर चौधरी ने का कि २०१६ में पहली बार ३० साल में 126 नियुक्तियां सीधे हुई है। इसके साथ ही १३१ नियुक्तियों में या तो कंफर्म किया गया या उनकी समयावधि बढ़ाई गई। वहीं २०१७ में भी सरकार ने करीब ७६ नियुक्तियां कर दी है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में जो 30 प्रतिशत पद खाली है। इसमें हाईकोर्ट कॉलेनेजियम की ओर से नहीं भिजवाए गए।उदयपुर और कोटा में बैंच का नहीं है प्रस्ताव
राज्य के उदयपुर और कोटा जिले में हाईकोर्ट बैंच बनाने को लेकर उठ रही मांग और आंदोलन के जवाब में चौधरी ने कहा कि इसमें केंद्र सरकार का रोल सीधा नहीं है। इसका प्रस्ताव हाईकोर्ट खुद चीफ चस्टिस ऑफ इंडिया को भेजती है। वे इसे स्वीकार करते हैं, तो प्रस्ताव सरकार के पास विचारणार्थ आता है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
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