
बासनी (जोधपुर).
नगर निगम की ओर से वार्डों में विकास की गंगा किस प्रकार से बहाई जा रही है चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर 11 में रहने वाले लोगों से बेहतर कोई नहीं बता सकता। यहां रहने वाले लोगों को घर से बाहर बेहतर वातावरण देने के लिए पूर्व में हाउसिंग बोर्ड की ओर से पार्क का निर्माण करवाया गया था, लेकिन पार्क में अब तक महज चारदीवारी के सिवा कुछ भी विकास नहीं हो पाया है। सालों पूर्व बनाए हुए इस पार्क में निगम भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसी वजह से पार्क में दिनों-दिन व्यवस्थाओं के बजाय अव्यवस्थाएं हावी हो रही हंै, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को पार्क के विकास की कोई फिक्र नहीं है। पार्क का विकास नहीं होने से इस सेक्टर में रहने वाले सैकड़ों लोगों को भ्रमण के लिए अन्यत्र जाना पड़ रहा है। पार्क की इन्हीं समस्याओं से रूबरू करवाती यह रिपोर्ट-
हरियाली का नहीं नामों निशान
पार्क का नाम आते ही हरे पेड़ पौधों का दृश्य जेहन में उभर आता है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस पार्क में हरियाली के नाम पर एक पेड़ भी दिखाई नहीं देता है। जबकि मुख्य रोड के नजदीक होने के चलते इस पार्क में रोजाना सैकड़ों की संख्या में सेक्टरवासी भ्रमण के लिए आते हैं।
बैठने की बैंच क्षतिग्रस्त, झूले ले गए लोग
प्रात:काल भ्रमण की चाह रखने वाले लोगों को इस पार्क का विकल्प नहीं होने से टहलने के लिए यहां आना पड़ता है। सुबह के खुशनुमा माहौल में हर कोई प्रकृति के अद्वितिय सौंदर्य को निहारना चाहता है, लेकिन इस पार्क में न तो बैठने के लिए बैंच है, न ही बच्चों के खेलने के लिए झूले। यहां आने वाले लोगों ने बताया कि पूर्व में पार्क मेें झूले लगे हुए थे, लेकिन निगम की नियमित देखरेख के अभाव में अज्ञात लोग मौके का फायदा उठाकर झूले भी उखाड़ कर ले गए। पार्क में पैदल पथ भी अस्तित्व खोने के कगार पर है।
शाम होते ही समाजकंटकों का डेरा
यहां पुलिस की गश्त भी कितनी प्रभावी है पार्क में शाम के समय के हालात बताते हैं। शाम के समय यहां पर आस-पास की जगहों से आने वाले समाजकंटक शराब, स्मैक आदि का सेवन करते हैं। इन्हें रोकने टोकने वाला भी कोई नहीं है। कानून व्यवस्था का तो समाजकंटकों को कोई खौफ नहीं है। क्योंकि पुलिस भी इन पर दिखावे की भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है।
परेशान हो रहे लोग
समाजकंटकों के खौफ के आगे पुलिस भी बेबस नजर आती है। वहीं पुलिस की इस नाकामी का फायदा तो समाजकंटक उठा रहे हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुकसान यहां बने मकानों में रहने वाले परिवारों को भुगतना पड़ता है। किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए शाम के समय यहां आम नागरिक आने से कतराते हैं।
निगम भी शून्य
पार्क के विकास के लिए निगम भी अब तक शून्य ही नजर आ रहा है। समय पर पार्क का विकास करवाया जाता तो यहां रहने वाले लोगों को टहलने के लिए अच्छा वातावरण मिल पाता, लेकिन निगम की अनदेखी ने लोगों के सपनों को मार दिया।
Published on:
12 Mar 2018, 9:45 PM IST
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