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Rajasthan: राजस्थान का बहुचर्चित नकली बीज घूसकांड, क्या फलोदी से लिखी गई थी 60 लाख की ‘स्क्रिप्ट’?

Fake Seed Scam: चर्चित नकली बीज घूसकांड की जांच अब नए मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। एसीबी की जांच में सामने आए 60 लाख रुपए के कथित लेन-देन के मामले में एक खाद-बीज कारोबारी की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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Fake Seed Scam

नागौर रोड स्थित दुकान जहां से जुड़े हैं नकली बीज रिश्वत मामले के तार। फोटो- पत्रिका

फलोदी। राजस्थान में चर्चित हुए नकली बीज घूसकांड की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां इसके तार सीधे फलोदी से जुड़ते नजर आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में सामने आए 60 लाख रुपए के कथित लेन-देन के मामले में अब एक खाद-बीज कारोबारी की भूमिका को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के अनुसार, फलोदी विधायक के पीए तक राशि पहुंचाने वाला मुख्य आरोपी सतपाल लंबे समय से फलोदी में खाद-बीज का व्यवसाय कर रहा है और उसकी शहर के नागौर रोड पर बड़ी दुकान संचालित है।

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माना जा रहा है कि विधायक के पीए गणपत विश्नोई और कारोबारी सतपाल के बीच संपर्क भी इसी व्यावसायिक नेटवर्क के जरिए स्थापित हुआ था। इसके बाद ही कथित तौर पर पूरे घूसकांड की पटकथा तैयार हुई। हालांकि, इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

60 लाख की रकम बनी जांच का सबसे बड़ा सवाल

एसीबी की जांच में सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर 60 लाख रुपए की राशि किन-किन व्यक्तियों के माध्यम से आगे बढ़ी और उसका अंतिम गंतव्य क्या था। जांच एजेंसियां अब कथित लेन-देन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रही हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी इसी बात की चर्चा है कि यदि इस कड़ी का खुलासा होता है तो राजस्थान में कई नए नाम सामने आ सकते हैं।

बीज के प्रचार से भी जुड़ रही चर्चाएं

सूत्रों के अनुसार, गजराज मूंगफली बीज की गुणवत्ता को लेकर जांच शुरू होने के बाद भी संबंधित बीजों की बिक्री बढ़ाने के प्रयास किए गए थे। बताया जा रहा है कि शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर बीजों का प्रचार-प्रसार किया गया। स्थानीय जानकारों का कहना है कि बीजों के प्रचार के लिए इस तरह का अभियान पहले कभी देखने को नहीं मिला था। दिलचस्प बात यह रही कि घूसकांड का खुलासा होने के कुछ समय बाद ये होर्डिंग भी हटा दिए गए।

गौरतलब है कि हाल ही में नकली बीज प्रकरण में एसीबी की कार्रवाई के दौरान फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई के पूर्व निजी सहायक गणपत विश्नोई का नाम सामने आया था। इस मुद्दे पर विधायक पब्बाराम विश्नोई ने कहा था कि गणपत की कथित गतिविधियों की जानकारी मिलने पर उन्होंने उसे 31 मई को ही निजी सचिव के पद से हटा दिया था। उन्होंने कहा था कि जब गणपत के संबंध में शिकायतें मिलने लगीं तो उन्होंने तत्काल उसे पदमुक्त कर दिया। विधायक के अनुसार, गणपत जयपुर स्थित विधायक आवास पर अपना सामान लेने आया था। इसी दौरान एसीबी ने उसे गिरफ्तार किया।