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काला कानून फिर से थोपने पर प्रदेश भर में जनआंदोलन की चेतावनी

मरुधरा अलर्ट संस्थान के बैनर तले कई अन्य सस्थाओं की संयुक्त बैठक  

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kala kanoon

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संभाग के जोधपुर , बाडमेर, जालोर, पाली व जैसलमेर में संचालित अधिवक्ताओं, कानूनविदों और गणमान्य नागरिकों की मरुधरा अलर्ट संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को अन्य संस्थानों के साथ हुई बैठक के बाद एक संयुक्त प्रस्ताव पारित करते हुए राज्यपाल को पत्र लिख कर सीआरपीसी में संशोधन का कोई भी प्रयास पारित नहीं करने की गुहार की गई है। पत्र में कहा गया है कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए फिर से ऐसा प्रयास किया गया तो संस्थानों के सदस्य सड़कों पर उतर कर जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

संस्थान अध्यक्ष पुखराज जैन ने बताया कि बैठक में यह भी पारित किया गया कि ऐसा संशोधन करने से भ्रष्टाचार बढेगा और लोकसेवकों की मनमानी और तानाशाही बढेग़ी। यह प्रयास जनता की आवाज दबाने का प्रयास होगा, जो किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता। बैठक में अन्य संगठनों के पदाधिकारी मसलन रमेश शर्मा, अमित व्यास, नवलसिंह दहिया, नरेशकुमार केतु व पंकज गहलोत आदि मौजूद रहे।

वहीं दूसरी ओर राजस्थान हाईकोर्ट ने वाणिज्यिक कर विभाग के एक अधिकारी के सेवानिवृत्ति के बाद निकाली गई करीब साढ़े अ_ारह लाख की रिकवरी की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाते हुए सेक्रेटरी डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंस टैक्सेज, कमिश्नर व सहायक कमिश्नर कॉमर्शियल टैक्सेज, संयुक्त निदेशक पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट आदि को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब तलब किया है। न्यायधीश अरुण भंसाली ने याचिकाकर्ता मोहब्बतसिंह की ओर से दायर याचिका की सुनवाई पर यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नरपतसिंह राजपुरोहित ने कहा कि वर्ष 1973 में राज्य सेवा में प्रवेश के समय याचिकाकर्ता की सेवा पुस्तिका में त्रुटिवश जन्म तिथि गलत इंद्राज हो गई, जो महज दो वर्ष बाद वर्ष 1975 में सक्षम अधिकारी ने दुरस्त कर दी थी। जिसके अनुसार जालोर व पाली वृत्त में करीब 40 वर्ष की सेवा करने के बाद याची वर्ष 2014 में सेवानिवृत हो गया। सेवानिवृत्ति के दो वर्ष बाद वर्ष 2016 में संयुक्त शासन सचिव राजस्थान सरकार वित्त कर विभाग जयपुर ने आदेश जारी करते हुए वर्ष 1975 में जन्म तिथि दुरस्त करने की कार्यवाही नियमानुसार नहीं मानी और याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति की तारीख के बजाय 2014 मानने के 2009 मानी, और प्रार्थी के पेंशन परिलाभों में से साढे अ_ारह लाख की रिकवरी करने का आदेश जारी कर दिया।

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