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महाराजा उम्मेदसिंह की यादगार : जोधपुर का पब्लिक पार्क

अगर आप घूमने फिरने के शौकीन हैं तो एक बार जोधपुर का पब्लिक पार्क जरूर देखें। जोधपुर का पब्लिक पार्क घूमने फिरने के लिए सबसे नजदीक और सर्व सुलभ पर्यटनस्थल है।  

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जोधपुर

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MI Zahir

Jul 08, 2018

public park jodhpur

public park jodhpur

जोधपुर. सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां, जिंदगानी गर रही तो नौजवानी फिर कहां? जोधपुर शहर का पब्लिक पार्क आम सीनियर सिटीजन्स और जोधपुराइट की खास पसंदीदा सैरगार है। वे यहां सुबह सुबह जॉगिंग करने और शाम को वक्त गुजारने के लिए आते हैं। क्यों कि यह जोधपुर शहर के बीच सबसे बड़ा पार्क है। इस पार्क तक पहुंचने के लिए बहुत ज्यादा दूरी तय नहीं करना पड़ती। यह पार्क इस तरह और एेसी जगह बनाया गया है कि सबकी पहुंच में रहे और सभी आसानी से आ-जा सकें। लाफिंग सीनियर सिटीजन हों या योगा करने वाले आम जोधपुराइटस, यह शहर के बीच सभी के लिए एक खुली जगह वाला पब्लिक पार्क है।

महाराजा उम्मेदसिंह ने उदघाटन किया था
आज 8 जुलाई है। यह महाराजा उम्मेदसिंह का जन्म दिन है। उम्मेद उद्यान का महाराजा उम्मेदसिंह और भारत के पूर्व वायसराय गर्वनर जनरल ऑफ इंडिया लॉर्ड विलिंगडन ने विधिवत उदघाटन किया था। मिस्टर गोल्ड स्ट्राइन इसके भव्य भवनों के वास्तुविद थे। शहर के बाशिंदों, आम जनता और पर्यटकों का शिकवा यह है कि काश सुमेर पब्लिक पार्क , जंतुआलय और चिडि़याघर इस पब्लिक पार्क का हिस्सा ही रहते और माचिया पार्क शिफ्ट न होते तो अच्छा रहता। उनका मानना है कि इस शहर के अधिकतर लोग पब्लिक पार्क में इन चीजों को देखते हुए ही बड़े हुए हैं। पर्यटकों को भी यह बात बहुत अखरती है कि इस पार्क की ये खास चीजें यहां से शिफ्ट कर दी गईं।

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उम्मेद उद्यान : फैक्टफाइल
उम्मेद उद्यान की जमीन : 82 एकड़
भवनोंं में गार्डन व जू के पिंजरोंं का उस समय कुल खर्च : 6,09,870 रुपए
उद्यान के प्रवेश द्वार : 5
सरदार म्यूजियम बना : 1909 में
उम्मेद उद्यान का उद्घाटन : 1935 में
सुमेर लाइब्रेरी बनी : 17 मार्च 1936
लाइब्रेरी सोजती गेट शिफ्ट : जुलाई-अगस्त २०१७
म्यूजियम को लाइब्रेरी की इमारत मिली : जुलाई-अगस्त २०१७
वाक इन एवरी बनी :1978 में, बाद में माचिया में शिफ्ट (उम्मेद पार्क का जंतुआलय और चिडि़याघर अब माचिया पार्क में शिफ्ट कर दिए गए हैं।)
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बहुत कुछ बदल गया
आज यहां वन विभाग का कार्यालय भी है। पार्क के बीच में और जनाना पार्क में बावड़ी बनी हुई है। इसका जलापूर्ति के दृष्टिकोण से इस्तेमाल किया जा सकता था। पहले पब्लिक पार्क के सभी गेट खुले थे और यहां सभी तरह के वाहन आते थे। इससे ध्वनि व वायु प्रदूषण की शिकायत से जुड़ी एक जनहित याचिका पर न्यायालय के आदेश से गेट बंद कर यहां वाहनों का आवागमन बंद किया गया। इससे पार्क में प्रदूषण नहीं होता है। यहां पहले जनाना पार्क पब्लिक पार्क का हिस्सा था, जहां लोग आ जा सकते थे। आज यह पार्क का हिस्सा नहीं है।
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