
उम्मेद अस्पताल परिसर में शातिर अंदाज से पार हो रहे मोबाइल, उड़ा रहे नकदी
-सुरक्षा गार्ड बोले, सीसीटीवी नहीं होने के कारण बढ़ रही हैं वारदातें, पुलिस नहीं कर रही सपोर्ट
जोधपुर.
नवजात की केयर में प्रदेश भर में अव्वल रहे उम्मेद अस्पताल में महिला एवं बच्चों के इलाज के लिए आने वाले परिजनों को अपना कीमती सामान व नकदी गवां कर परेशान होना पड़ा है। पिछले कुछ समय से अस्पताल के बाहर खुले परिसर में मरीजों के साथ आने वाले लोगों की जेबों से नकदी, गहने, मोबाइल चुराने की घटनाएं बढ़ रही है।
रेक्सो कम्पनी की ओर से लगाए गए सुरक्षा गार्डों के अनुसार निगरानी के बावजूद जेब तराशनी, मोबाइल पार कर लेने की हरकतें नहीं थम रही है। सुरक्षा गार्डों के अनुसार प्रतिदिन 10 से 15 घटनाएं हो रही है। इस तरह की घटनाएं प्रवेश द्वार पर लगी कतार, लेबर रूम की तरफ प्रतीक्षालय में अधिक हो रही है। इसके अलावा रात के समय जब मरीज के परिजन बाहर खुले मेंं सोते है तब शातिर लोग पर्स व मोबाइल चुरा ले जाते हैं। चौकानें वाला पहलू तो यह है कि ऐसी वारदातों में महिलाएं भी शामिल है। पत्रिका ने अस्पताल परिसर में कुछ लोगों से बात की तो घटनाएं सामने आ गई और मोबाइल खो चुके पीडि़त लोगों का दर्द छलक पड़ा।
चेतावनी एनाउंस से भी नहीं चेत रहे-
अस्पताल परिसर में सुरक्षा गार्ड रघुनाथसिंह राठौड़ सुबह से शाम तक घूम-घूम कर छोटे से माइक के जरिए लोगों को चोरों से सावधान रहने के लिए एनाउंस करते हैं। इसके बावजूद गांवों से आए लोग शातिर लोगों की चपेट में आ जाते हैं। ऐसी वारदातों में महिलाओं के गले से चेनें, टूसी, मोबाइल फोन व नकदी चुरा लेते हैं। यहां पुलिस के जवान तैनात रहने के बावजूद कोई नियंत्रण नहीं है।
ऐसे पार हो जाते हैं मोबाइल व गहने-
शातिर महिला या पुरुष कतार में खड़े रहकर मोबाइल फोन पार कर लेते हैं। इसके अलावा अस्पताल में शातिर महिला अपनी गोदी में बच्चा उठाए आती है और उस शिकार को ताड़ती है, जिस महिला के पास महंगा मोबाइल है या गले मेंं सोने की चेन या टूसी पहनी है। जहां वह महिला सोती है, रात को शातिर महिला भी उसके पास जाकर सो जाती है और जैसे ही महिला को नींद आती है, शातिर महिला उसका मोबाइल लेकर गायब हो जाती है। कुछ मामले तो ऐसे भी सामने आए कि शातिर अपनी पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहन कर भी आ जाते हैं और महिलाओं की भीड़ में खड़े रहकर जेबतराशी कर लेते हैं। कुछ जगह लगे सीसीटीवी में दिखाई देने के बावजूद शातिर पकड़ में नहीं आ रहे।
पुलिस नहीं करती प्रभावी कार्रवाई-
सुरक्षा गार्डों की लाचारी साफ झलकती है। उनका कहना है कि उनके पास किसी के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार नहीं है। वो किसी को पकड़ते हैं तो लोग उनसे ही झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। पुलिस भी उन पर हावी हो जाती है। कई बार पुलिस आरोपियों को पकड़कर ले जाती है, लेकिन पुलिस उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करती है, पलटकर कभी नहीं बताया। गार्ड रघुनाथसिंह का कहना रहा कि पुलिस का पूरा सपोर्ट नहीं मिलने से अस्पताल परिसर में चोरी की घटनाएं कम नहीं हो रही है।
केवल दो जगह ही सीसीटीवी-
उम्मेद अस्पताल में प्रतिदिन हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन अस्पताल में केवल दो जगह- रजिस्ट्रेशन कक्ष व प्रवेश द्वार तथा लेबर रूम के पास ही सीसीटीवी लगे हैं। इसके अलावा अस्पताल मेंं कुछ कैमरे लगे हैं, लेकिन खराब पड़े हैं और अधिकतर जगहों पर कैमरे ही नहीं है।
एमजीएच में प्रतिदिन पार हो रहे 5 से 7 मोबाइल
जोधपुर.
शहर के मध्य स्थित सबसे पुराना महात्मा गांधी अस्पताल भी चोरों के चंगुल से मुक्त नहीं हैं, जबकि अस्पताल परिसर में ही पुलिस चौकी चल रही है। सुरक्षा गार्डों की तैनाती के बावजूद यहां मरीजों या उनके साथ आए लोगों के मोबाइल व नकदी पार कर ली जाती है। अस्पताल प्रशासन के जुड़े अधिकारी भी यह बात स्वीकार करते हैं कि अस्पताल में प्रतिदिन 5 से 7 घटनाएं हो जाती है। गार्डों की ओर से कुछ शातिरों को पकड़ा भी जाता है, लेकिन पुलिस की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ऐसी गतिविधियां नहीं रूक रही है।
Published on:
21 Aug 2018 12:46 am
