29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

टाउन हॉल में सजा विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य का इन्द्रधनुष

  लोकानुरंजन मेले के दूसरे दिन दर्शकों ने उठाया लुत्फ

2 min read
Google source verification
टाउन हॉल में सजा विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य का इन्द्रधनुष

टाउन हॉल में सजा विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य का इन्द्रधनुष

जोधपुर. राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से तीन दिवसीय लोकानुरंजन मेले में शुक्रवार को नौ राज्यों के लोक कलाकारों ने जोधपुर के टाउन हॉल के मुक्ताकाश मंच और प्रेक्षागृह में लोक कलाओं की रंगारंग प्रस्तुति दी तो सूर्यनगरी में लघु भारत की छवि साकार हो उठी। दूसरे दिन भी लोककला प्रेमी दर्शकों ने दो सत्रों में हुए इन्द्रधनुषी लोकनृत्य के कार्यक्रमों का भरपूर लुत्फ उठाया।

लोकानुरंजन की शाम टाउन हॉल परिसर के प्रथम सत्र में राजस्थान के परम्परागत लोक नृत्य, वादन व गायन के अलावा लुप्त होती जादूकला व कठपुतली प्रदर्शन ने लोगों को आकर्षित किया। इस सत्र में जानकीलाल चाचौड़ा का चकरी नृत्य, गोपाल धानुक शाहबाद का सहरिया, पवन कुमार लक्ष्मणगढ़ का बम्ब, अकरम बांदीकुई बहरूपिया, एहसान साथियों का सामुहिक शहनाई वादन, गंगादेवी पादरला तेरहताली नृत्य, विजयलक्ष्मी व महेश आमटा उदयपुर चरी नृत्य, जितेन्द्र पाराशर का डीग मयूर नृत्य, बालोतरा उकाराम परिहार लाल आंगी गेर, अचलाराम डांडिया, रूघनाथ कालबेलिया, श्यामाराम तीन ढोल थाली, बांकिया वादन, दिलावार कच्ची घोड़ी, युसुफ खान के भपंग वादन ने समा बांध दिया।

महाराष्ट्र के कोळी नृत्य, गोवा के केंकणी, राजस्थानी मांगणियार बंधुओं ने किया मंत्रमुग्ध
प्रेक्षा गृह के भीतर देउ खान मांगाणीयार की सिम्फ ोनी व लोकगीत के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में दर्शकों का मन मोहा। मांड राग में स्वागत गीत केसरिया बालम.़.़.़ बालमजी म्हारा झिरमिर बरसे.़.़.़तथा निम्बूड़ा प्रस्तुत कर झूमने पर विवश किया। मोरचंग, खड़ताल और ढोलक की जुगलबंदी के साथ देबू खां, मुलतान खां, बड़े गाजी खां, कंवरू खां, सवाई खां, रोशन खां, शरीफ खां, सकी खां, डिले खां ने जमकर तालियां बटोरी। जम्मू-कश्मीर का रूफ नृत्य, हरियाणा के अशोक गुड़ा व साथियों का फ ाग नृत्य, प्रकाश कोली नृत्य,गोवा का समई नृत्य, शीशपालसिंह रोहतक का पणिहारी नृत्य, गुजरात के महेन्द्र भाई का रासी, जोगी दरासिंह हब्बी का नृत्य, पंजाब के अमरेन्द्रसिंह का भांगड़ा व कंचनभाई के राठवा नृत्य ने इंद्रधनुषी छठा बिखेरी और दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। आरंभ में अकादमी सचिव एलएन. बैरवा ने अतिथियों का स्वागत तथा बिनाका जैश व प्रमोद सिंघल ने संचालन किया। समारोह में अकादमी अधिकारी रमेश कंदोई व अरूण पुरोहित ने संयोजन किया

Story Loader