भाजपा और कांग्रेस की ओर से जिन 4 सीटों पर प्रत्याशी उतारे गए हैं, उनमे कहीं भी आमने-सामने की भिड़ंत फिलहाल नहीं है।
जोधपुर। भाजपा और कांग्रेस की ओर से जिन 4 सीटों पर प्रत्याशी उतारे गए हैं, उनमे कहीं भी आमने-सामने की भिड़ंत फिलहाल नहीं है। भाजपा दो सूची जारी कर चुकी है, लेकिन इसमें दोनों में एक-एक नाम ही सामने आए हैं। इस बात से यह स्पष्ट है कि भाजपा में टिकटों की राह आसान नहीं है। संगठन, केन्द्रीय मंत्री और आरएसएस के अलावा केन्द्रीय एजेंसियों का सर्वे भी अलग-अलग राह पर जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने एंटीइनकमबेंसी को मानने से इनकार करते हुए सभी चार चेहरे रिपीट किए हैं।
जोधपुर में भाजपा के लिए सिर फुटव्वल वाली स्थिति
भाजपा ने अपनी दोनों सूची में जोधपुर जिले से सिर्फ दो टिकट दिया है। यह स्पष्ट तौर पर अलग-अलग सर्वे में सिर फुटव्वल वाली स्थिति है। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री व गजेन्द्र सिंह शेखावत की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। वह खुद मैदान में उतरेंगे या नहीं इस पर अभी तक संशय है। सवाल यह भी है कि वह जिले की अब बची आठ सीटों में से किस सीट पर उतरेंगे। इसके अलावा फलोदी, लूणी, शेरगढ़ और ओसियां सीट पर रिपीट कार्ड खेलने से डेमेज कंट्रोल की सोच रही है। वहीं भाजपा को यह उम्मीद थी कि कांग्रेस की सूची में कई नाम सामने आ जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
शहर और सरदारपुरा के जातिगत समीकरण फंसे
भाजपा के लिए जोधपुर शहर व सरदारपुरा सीट पर जातिगत समीकरण फंस गए हैं। कांग्रेस ने यहां रिपीट कार्ड खेल दिया है। भाजपा अब यहां प्रत्याशी रिपीट करने से बचना चाह रही है। अब तक शहर सीट वैश्य के खाते में जाती थी, लेकिन अब कांग्रेस सूची के बाद भाजपा के समीकरण बदल सकते हैं। सांसद की भूमिका पर अब भी सवाल खड़े हैं। सरदारपुरा में कभी पार्टी टिकट रिपीट नहीं करती। इसलिए इस बार भी नया चेहरा ही खोजा जा रहा है। हमेशा की तरह राजपूत प्रतिनिधि उतारा जाए या फिर माली समाज के किसी नेता को मौका दिया जाए।
सूरसागर की कहानी थोड़ी अलग
कांग्रेस की पहली सूची जारी होने से कुछ समय पहले भाजपा ने अपनी दूसरी सूची जारी की। इसमें सूरसागर से प्रत्याशी को शामिल कर लिया। वर्तमान विधायक का टिकट काटा, लेकिन पुष्करणा समाज से ही देवेन्द्र जोशी को टिकट दे दिया। यदि यह टिकट कुछ दिन पहले जारी हो जाता तो कांग्रेस यहां भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी होती।
असली माथापक्ची बाकी छह सीटों पर
कांग्रेस में असली माथापक्ची अब शुरू होगी। 10 में से 6 टिकट अभी घोषित होने बाकी हैं। यह वही सीटें जिनमें प्रत्याशियों को रिपीट करने से कांग्रेस डर रही है। लूणी, सरदारपुरा, ओसियां और सरदारपुरा कांग्रेस के लिए ऐसी सीटें थी, जहां ज्यादा विकल्प नहीं थे। इसलिए यह सेफ सीट थी।
अब इन सीटों पर कशमकश
- फलोदी : पहले महेश व्यास यहां से उम्मीदवार थे, लेकिन इस बार सूरसागर और फलोदी के बीच जातिगत समीकरण बदले जा सकते हैं। इसीलिए इसे होल्ड पर रखा गया है।
- लोहावट : स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण यहां भी वर्तमान विधायक का टिकट रोका गया है। संभावना है कि यहां भी प्रत्याशी बदले जा सकते हैं।
- बिलाड़ा : भाजपा ने यहां सबसे पहले अपना पत्ता खोल दिया, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं उतार पा रही है। एससी सीट पर दोनों ही पार्टियों के पास ज्यादा विकल्प नहीं है। लेकिन फिर भी कांग्रेस यहां विनिबिलिटी वाले प्रत्याशी पर एकराय नहीं हो पा रही है।
- भोपालगढ़ : इस आरक्षित सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी भंवर बलाई का निधन हो चुका है। ऐसे में यहां भी योग्य उम्मीदवार की तलाश की जा रही है।